वयोवृद्ध पत्रकार पेंशन प्रकरण अधर में कब तक?

न्यूज़ डेस्क : उत्तराखंड सरकार ने जन-समस्याओं के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू की हुई है। बेशक, इस हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों का हल देर-सवेर जरूर होता होगा। लेकिन ताज्जुब तब होता है जब पत्रकारों की एक लंबित समस्या को लंबा खींचा जा रहा है। यह प्रकरण वयोवृद्ध पत्रकार पेंशन का है। 2017 के बाद प्रकरण आश्वासनों पर चल रहा है। इस संबंध में शासन, सूचना एवं लोक-सम्पर्क विभाग से अनेकों बार गुहार लगाने के बाबजूद भी कोई हल निकलता नजर नहीं आया तो मजबूरन मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में गुहार लगानी पड़ी। यह गुहार राज्य के एक वयोवृद्ध स्वतंत्र पत्रकार द्वारा 30-06-2019 को लगाई गयी थी। जिसका जवाब विभाग ने संतोषजनक तो दिया लेकिन एक साल का समय बीतने जा रहा है समस्या का निराकरण आज तक नहीं हुआ। जबकि, पेंशन समिति भी गठित है। ऐसे में असमंजसता की स्थिति यह बनी हुई है कि आखिरकार कौन इसमें बाधक बन रहा है। या गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकने का खेल खेला जा रहा है। सरकार यदि वयोवृद्ध पत्रकार पेंशन देने की स्थिति में नहीं है या मंशा नहीं है तो प्रकरण अधर में लटकाने के बजाय स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हर बार कुछ न कुछ पेंच फंसाकर वयोवृद्ध पत्रकारों के साथ नाइंसाफी की जा रही है। ऐसे में ‘आपकी सरकार आपके द्वार’ जैसे नारे का भी कोई औचित्य नहीं रह जाता।

– ओम प्रकाश उनियाल

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