मेहनत ही सफलता की सीढ़ी : वंदना कटारिया
मेहनत ही सफलता की सीढ़ी : वंदना कटारिया
मेहनत ही सफलता की सीढ़ी : वंदना कटारिया

मेहनत ही सफलता की सीढ़ी : वंदना कटारिया

हरिद्वार। वंदना ने नए और उभरते हुए खिलाडिय़ों को सलाह देते हुए कहा कि मेहनत ही सफलता की सीढ़ी है। हार्डवर्क और डिसिप्लिन पर फोकस करने के साथ ही रिजल्ट के लिए भी इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि मेहनत करने के बाद बेहतर रिजल्ट मिलेगा। हरिद्वार के छोटे से गांव रोशनाबाद से अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना जलवा बिखेरने वाली वंदना कटारिया ने हरिद्वार पहुंचने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि आने वाला समय नए खिलाडिय़ों का है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में हॉकी के कई बेहतर खिलाड़ी हैं। यहां से और भी प्लेयर निकल सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह भी इस पर मेहनत कर रही हैं। उन्होंने नए खिलाडिय़ों को संदेश देते हुए कहा कि परिश्रम के साथ ही डिसिप्लिन पर भी फोकस करना चाहिए। हार्डवर्ड करने के बाद रिजल्ट जरूर मिलता है और रिजल्ट बेहतर होता है। जितना हार्डवर्क बेहतर होगा उससे कई अधिक बेहतर रिजल्ट खिलाडिय़ों को मिलेगा।

पिता की प्रेरणा से ही इस मुकाम तक पहुंची

हरिद्वार रोशनाबाद के स्वागत समारोह कार्यक्रम के बाद वंदना अपनी मां सोरण देवी से लिपट कर रो पड़ी । यह दृश्य देख हर कोई भावुक हो गया। मीडिया से बातचीत के दौरान पिता को याद कर वंदना की आंखें डबडबाई और उन्होंने अपने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए पिता की प्रेरणा को भी सहारा बताया। वंदना ने कहा कि पिता की प्रेरणा से ही वह आज इस मुकाम पर पहुंची हैं। रोशनाबाद के जिस स्टेडियम में पहली बार वंदना कटारिया ने हाथों में हॉकी पकड़ी थी। उसी स्टेडियम में वंदना कटारिया का जिला प्रशासन और खेल विभाग की ओर से स्वागत समारोह आयोजित किया गया था। स्वागत समारोह में पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी आगे की रणनीति के बारे में बताया। कार्यक्रम खत्म हुआ ही था कि एक कमरे में बैठी उनकी मां सोरण देवी से वंदना की मुलाकात हुई। डेढ़ साल बाद अपनी मां से मिल रही वंदना लिपट गई और आंसुओं की धारा बहने लगी। यह वह दृश्य था जो हर कोई देख भावुक हो गया और अपने पिता नाहर सिंह की याद पुरानी बातें याद कर वंदना अपने आंसुओं को नहीं रोक पाई। वंदना ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से वह इसी बात को याद कर रही थी कि जब वह घर पहुंचेंगी और अपने पिता के कमरे में जाएगी तो उन्हें वहां ना पाकर वह सह नहीं पाएगी। वंदना ने कहा कि पिता की प्रेरणा से ही वह आज इस मुकाम तक पहुंची हैं। पिता का सपना था कि ओलंपिक में भारतीय टीम को मेडल जीतकर लाना है। लेकिन वह सपने के बेहद करीब पहुंची और अंतिम समय तक अपने पिता के सपने के लिए लड़ती रही।

वल्र्ड कप, एशियन गेम और कॉमनवेल्थ गेम्स पर फोकस

ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए अगला साल बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। भारत की स्टार फॉरवर्ड वंदना कटारिया ने कहा कि ओलंपिक में हार का बदला कॉमनवेल्थ गेम और एशियन गेम के साथ ही वल्र्ड कप में लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले साल होने वाले महत्वपूर्ण टूर्नामेंट के लिए तैयारियां शुरू होने वाली हैं। उन्होंने कहा कि अब अगला फोकस वल्र्ड कप, एशियन गेम और कॉमनवेल्थ गेम्स में होगा। जिसमें टीम को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन कर सभी के दिलों में जगह बनाने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम से वर्ष 2022 में होने वाले टूर्नामेंट को लेकर काफी उम्मीदें हैं। उन्हीं उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए टीम की कप्तान रानी रामपाल के नेतृत्व में महिला हॉकी टीम जल्द ही तैयारियों में जुटने वाली है। हरिद्वार पहुंची भारत की स्टार खिलाड़ी वंदना कटारिया ने कहा कि ओलंपिक में पदक न लाने का मलाल उनके जेहन में हमेशा रहेगा। लेकिन अब अगले साल होने वाले महिला हॉकी वर्ल्ड कप के साथ ही चीन में होने वाले एशियन गेम पर उनकी निगाह है। टीम से शानदार प्रदर्शन करने की उम्मीद रहेगी।

Share this story