सावधान : जीपीएस ट्रैकर को जाम कर हो रही हैं गाड़ी चोरी

सावधान:  जीपीएस ट्रैकर को जाम कर हो रही हैं गाड़ी चोरी

देहरादून। समय के साथ साथ कार चुराने वाले चोर भी अब हाईटेक हो गए हैं। अब उन गाड़ियों का भी अब कोई पता नहीं चल पा रहा है जिनमें जीपीएस ट्रैकर लगे है। शहर में वाहन चोर अब इलेक्ट्रॉनिक जैमर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन जैमर के जरिए कार में लगा जीपीएस अलर्ट सिस्टम बेअसर हो जाता है जिससे वह वाहन मालिक को अलर्ट नहीं भेज पाता। जीपीएस सिस्टम बेअसर होने के चलते चोरी हुई कारों की लोकेशन भी पता नहीं चला पाती।

एनसीआरबी के सूत्रों की मानें तो पुलिस को हाल ही में चोरों की इस नई तकनीकी के बारे में पता चला है। पुलिस ने कार चोरी के एक बड़े गिरोह को पकड़ा था। यह लोग  तमाम राज्‍यों में कारों की चोरी कर रहे थे और उन्हें अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और विहार के पूर्वी चंपारण समेत नेपाल के कई क्षेत्रों में भेज रहे थे। पिछले दिनों दिल्‍ली पुलिस ने इस तरह के गिरोह के चार सदस्यों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। इनके पास से चोरी की 12 कारें, एक इलेक्ट्रॉनिक जैमर, कारों के विभिन्न मॉडलों की 345 चाबियां, एक चाबी बनाने वाली मशीन और लाखों की दो प्रोग्रामिंग मशीनें बरामद की हैं।" पुलिस ने तीन पिस्तौल, 14 कारतूस और तीन वॉकी-टॉकी भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल गिरोह के सदस्य आपस में बातचीत करने के लिए करते थे।

दिल्ली पुलिस के  एसीपी राम अवतार, इंस्पेक्टर कमलेश समेत अन्य 'ऑटो चोरी रोधी दस्ते' ने गिरोह का भंडाफोड़ किया। टीम ने द्वारका और उसके आसपास हाल ही में रिपोर्ट की गई घटनाओं से संबंधित सुराग इकट्ठा करने और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के साथ ऑपरेशन शुरू किया। इस संबंध में खुफिया और सूचना एकत्र करने के लिए स्थानीय मुखबिरों को भी लगाया गया था। पुलिस ने सबसे पहले द्वारका सेक्टर 26 से सुनील और उसके सहयोगी मंजीत नाम के एक संदिग्ध को पकड़ा। बाद में उन्होंने उनके ठिकानों से चोरी की छह कारों के साथ-साथ ढेर सारे उपकरण बरामद किए।

दोनों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर, पुलिस ने बिहार के पूर्वी चंपारण में छापा मारा और अमजद खान नाम के एक रिसीवर को गिरफ्तार कर लिया। खान पुलिस को अरुणाचल प्रदेश में अपने सहयोगी नकुलम बिसई तक ले गया, जो एक ट्रैवल एजेंसी चलाता था और चोरी की कारों को टैक्सियों के रूप में इस्तेमाल करता था। दो कार चोरों ने अरुणाचल पहुंचने तक चोरी की कारों के ट्रैकिंग सिग्नल को ब्लॉक करने के लिए जैमर का इस्तेमाल किया था। बाद में जब कारें अरुणाचल पहुंचीं तो वहां ट्रैवल एजेंसी के टैक्सी बेड़े में तैनाती से पहले इंजीनियरों द्वारा जीपीएस को हटा दिया गया था। दोनों ने खुलासा किया कि ऐसे जैमर कई अन्य गिरोहों द्वारा भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि इस गिरोह ने पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्‍तराखण्‍ड, उत्‍तर प्रदेश व एनसीआर समेत कई राज्‍यों से नयी नयी गाडि़यों की चोरी इसी तकनीक का इस्‍तेमाल कर की है।

जिन कारों में जीपीएस नहीं होता, उनके मालिक भी मार्केट से 5,000 रुपये में लगवा सकते हैं। इससे कार चोरों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई। उन्हें इसकी काट निकाली और जैमर का इस्तेमाल करने लगे। पुलिस के अनुसार, 'आरोपियों ने दावा किया कि जैमर्स करीब 1 लाख रुपये के आते हैं और प्रोग्रामिंग मशीन 1.8 लाख रुपये की आती है। चाबी बनाने वाली मशीन करीब 1.6 लाख रुपये की एक आती है।'

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