हिमालय क्षेत्र की समस्याओं का निराकरण करना प्राथमिकता : धन सिंह
हिमालय क्षेत्र की समस्याओं का निराकरण करना प्राथमिकता : धन सिंह

पौड़ी। ज्योग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल हिमालय संस्था की ओर से हिमालय दिवस पर ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि हिमालय मोक्षदायिनी पवित्र नदियों का अविरल स्रोत है। सनानत धर्म ग्रंथों में हिमालय को पूजनीय माना गया है। उन्होंने कहा भारत की सुरक्षा की दृष्टि से हिमालय शांति, सुरक्षा व समरसता का भी प्रतीक है। विशेषज्ञों ने कहा कि हिमालय विश्व की प्राकृतिक धरोहर है, इस संवेदशील मुद्दे को लेकर छात्रों व युवाओं को जागरुक बनाना जरुरी है।

शुक्रवार को हिमालय दिवस पर ज्योग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल हिमालय संस्था द्वारा आयोजित वेबिनार का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रदेश के उच्च शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हिमालय के संरक्षण को लेकर गंभीर है। हिमालय क्षेत्र की समस्याओं का निराकरण सरकार की प्राथमिकता है। गढ़वाल विवि के बीजीआर परिसर पौड़ी में भूगोल विभाग की विभागाध्यक्ष व संस्था की अध्यक्ष प्रो. अनीता रुडोला ने कहा कि भारत ही नहीं विश्व में हिमालय मोक्षदायिनी पवित्र अविरल नदियों का स्रोत है। जो संपूर्ण जैव विविधता को संतुलित बनाता है। कहा भारतीय जन जीवन को आध्यात्मिक ही नहीं सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक रूप से भी परस्पर जोड़ता है।

सोसायटी के संस्थापक प्रो. कमलेश कुमार ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में उत्तरदायी प्रशासिक परिस्थितियों के अभाव व राजनीतिक नेतृत्व की उदासीनता के कारण समस्याएं निरंतर बढ़ती जा रही हैं। जो बहुत की चिंतनीय है। कहा कि प्रदेश में पर्यटन को प्रभावी व जी‌वीकोपार्जन का मुख्य साधन बनाए जाने के साथ-साथ संपूर्ण क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखना अपरिहार्य शर्त है। जिसके लिए युवाओं व छात्रों को प्रेरित-जागरूक बनाना जरूरी है। प्रो. कुमार ने कहा जल संरक्षण के लिए लघु हिमालय क्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण को बंजर/परती भूमि पर धरातल अनुसार 10- 20 मीटर लंबी और .35-.50 मीटर गहरी नालियों का निर्माण करना होगा। वक्ताओं ने कहा तापमान में वृद्धि के साथ-साथ प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या भी बढ़ती जा रही है।

नदियों व जलधाराओं के प्रवाह को अविरल बनाए रखने के लिए सड़क निर्माण, चौड़ीकरण व भूस्खलन का मलबा सीधे नदियों में डाला जा रहा है, जो जलधाराओं के प्रवाह को अवरुद्ध कर रहा है। सोसायटी से जुड़े डा. प्रेम लाल टम्टा, प्रो. पंकज पंत, डा. किरण त्रिपाठी, डा. कमल बिष्ट और डा. मंजु भंडारी ने भी विचार व्यक्त किए। वेबिनार का आयोजन और संयोजन असिस्टेंट प्रोफेसर डा. राजेश भट्ट ने किया।

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