उत्तराखंड विशेष : सुशासन की ओर, धामी सरकार

टीम डिजिटल : कहावत है ‘पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं’ अर्थात् वर्तमान से भविष्य का पता चल जाता है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर यह कहावत सटीक बैठ रही है। वैसे तो जब पहली बार अल्प समय के लिए धामी ने राज्य की बागडोर संभाली थी तभी उन्हें लोकप्रियता मिलने लगी थी। दुबारा राज्य की सत्ता संभालने पर भी उनका जुझारूपन बना रहा। ऊर्जावान कार्यशैली व कार्यक्षमता के कारण उनसे राज्यवासी काफी उम्मीद लगाए बैठे हैं।

अभी चारधाम यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से शुरु करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। वह भी फिलहाल सुचारु तौर से चल रही है। विकास सबंधी कार्यों की भी सुध अपने स्तर से ले ही रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने सचिवालय में आहुत अधिकारियों की बैठक में ‘गुड-गवर्नेंस’ (सुशासन) अंतिम पंक्ति मे खड़े व्यक्ति तक पहुंचने के निर्देश अधिकारियों को दिए। वैसे तो भाजपा का सुशासन के नारे का अनुभव तो राज्यवासी पार्टी के पिछले पांच साल के कार्यकाल में ले ही चुके होंगे।

अब पुन: भाजपा का संकेत ‘मिशन 2024’ की तरफ है। हालांकि, विरोधियों के बीच यह भी कानाफूसी चल रही है कि ‘नया मुल्ला अल्ला ही अल्ला पुकारता है’। अब ये विरोधी विपक्षी भी हो सकते हैं और अपने वो भी जिनकी चाहत पूरी न हो रही हो।

सीएम बनने के छह माह के भीतर धामी को चुनाव जीतना जरूरी है। उनके सामने अभी स्वयं को विधानसभा सदस्य साबित करने की सबसे बड़ी चुनौती है। वे चंपावत विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ेंगे। 31 मई को इस सीट के लिए उपचुनाव होना है। कांग्रेस ने इस सीट पर नेत्री निर्मला गहतोड़ी को उतारा है।

उनकी भी पकड़ मजबूत तो है लेकिन जनता पार्टी को महत्व देगी या उनकी व्यक्तिगत छवि को, अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। धामी पर वे कितना भारी पड़ेंगी यह तो परिणाम ही बताएगा। आगे गुड-गवर्नेस का नारा कितना प्रभावी होगा इस पर नजर रखनी पड़ेगी।

– ओम प्रकाश उनियाल

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