अनलॉक-1 : अब कोरोना को लॉक रखने का जिम्मा जनता का

अर्थव्यवस्था के बढ़ते हुए दबाव लॉकडाऊन से त्रस्त मजदूरों का लगातार पलायन एवं कोरोना संक्रमण के ग्राफ पर लॉक डाऊन के घटते हुए असर ने संभवत: सरकार को लॉकडाऊन ५.० लाने से रोक दिया या फिर यूं कहिए कि एक बार फिर से शब्दों के जादूगर नरेंद्र मोदी ने अपने शब्द अस्त्र से, पस्त होते देश में एक नई ऊर्जा भरने का भागीरथ प्रयास किया है जिसका परिणाम है अनलॉक-1 । अभी तक एक आम धारणा यह थी कि कोविड-19 के संक्रमण की वजह से हम लोग घरों में बंद कर दिए गए हैं और कोरोना का प्रकोप फिर भी थमने का नाम नहीं ले रहा है । पिछले 3-4 दिनों से लॉकडाऊन चार के बावजूद देश में प्रतिदिन संक्रमितों की संख्या 6000 से 7000 के बीच बढ़ रही थी और अब तक यह संख्या पौने दो लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है । इसका मतलब साफ है कि पूरे प्रयासों के बावजूद भी संक्रमण की गति का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा था । ऐसे में सरकार के विशेषज्ञों ने जब राज्यों के साथ मंत्रणा की तो वहां से अर्थव्यवस्था की बदहाली एवं जीडीपी के लगातार गिरने के समाचार मिले । साथ ही साथ औद्योगिक उत्पादन लगभग ठप हो चला था। जहां पर उत्पादन कार्य चल भी रहे थे वहां भी उत्पादित सामग्री को बाजार तक पहुंचाने का कार्य बड़ा मुश्किल हो रहा था साथ ही साथ सरकार द्वारा ट्रेन एवं बसें आदि चलाने के बावजूद भी एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश की तरफ मजदूर तबका हजारों मीलों की दूरी पैदल साइकिल या रिक्शा अथवा टेंपो आदि के माध्यम से तय कर रहा था । यानी एक तरफ लॉकडाऊन भी था और हर तरफ एक जगह से दूसरी जगह जाना भी बदस्तूर जारी था। यह तो पहले से ही तय था कि यदि व्यक्ति चाहे वें मजदूर हों या उद्यमी अथवा कर्मचारी एक स्थान से दूसरे स्थान, एक शहर से दूसरे शहर या गांव में जाएंगे तो संक्रमण की मार वहां तक पहुंचेगी ही । और ऐसा ही हुआ भी । पिछले हफ्ते ही सरकार ने अंतर्देशीय फ्लाइट से भी शुरू कर दी थी तो ऐसे में प्रश्न यह था कि यदि एक जगह से दूसरी जगह जाने का कार्य होना ही है तब ऐसे में उद्योग व्यापार बाजार कार्यालयों या अन्य आर्थिक गतिविधियों को बंद रखने का क्या लाभ । हां, इससे केवल और केवल आर्थिक हानि ही हो रही थी। अतः अतः सरकार ने लॉकडाऊन पांच लाने की बजाय अनलॉक एक लाना कहीं ज्यादा उचित समझा। जहां अनलॉक एक से सरकार यह संदेश दे रही है कि वह अब जबरदस्ती लोगों को घरों में बंद नहीं रखना चाह रही है । वहीं इस कदम से मोदी सरकार ने विपक्ष के उन नेताओं की भी बोलती बंद करने का प्रयास किया है जो लगातार लॉकडाऊन बढ़ाने पर उंगलियां उठा रहे थे और सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे थे । यानी अनलॉक वन लाकर सरकार ने आर्थिक के साथ-साथ ही राजनीतिक लक्ष्य भी साधने की कोशिश की है। अनलॉक वन का मतलब होगा कि अब कंटेनमेंट जॉन को छोड़कर बाकी जगहों पर बाजार और अन्य गतिविधियां सुबह 7:00 बजे से रात 9:00 बजे तक चल सकेंगी पर रात्रि 9:00 बजे से प्रातः 5:00 बजे तक आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा मगर आपातकालीन स्थिति में वहां भी आया जाया जा सकेगा। अब ऐसा भी नहीं है कि हम यह मान ले कि सरकार ने सारे प्रतिबंध उठा ही दिए हैं। हालांकि 8 जून से राज्य सरकारों की अनुमति से मंदिर, रेस्टोरेंट, मॉल आदि खुल तो जाएंगे लेकिन अभी भी इन पर सोशल डिस्टेंसिंग की पाबंदी लगी रहेगी। कोरोना वायरस के प्रभाव के बीच बढ़ते दबाव के चलते केंद्र सरकार ने अब लॉकडाउन खोलने की तैयारी करनी शुरू कर दी है। तीन चरणों में लॉकडाउन खोला जाएगा। देश में एक जून से 30 जून तक नई रियायतों के साथ एक महीने के लिए कंटेनमेंट जोन के बाहर की सभी गतिविधियों को फिर से तीन चरणों में खोलने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। पहले चरण में सार्वजनिक स्थानों और पूजा के सार्वजनिक स्थान; होटल, रेस्तरां और अन्य आतिथ्य सेवाएं और शॉपिंग मॉल को 8 जून से खोलने की अनुमति दी जाएगी। सरकार इस संबंध में दिशानिर्देश जारी करेगी । सार्वजनिक स्थानों पर शराब, पान, गुटखा तंबाकू का सेवन प्रतिबंधित रहेगा। नए दिशानिर्देशों में कंटेनमेंट जोन में और सख्ती से लागू की गई है।नए दिशानिर्देशों के मुताबिक रात का कर्फ्यू जारी रहेगा, जो जरूरी चीजें हैं, उनके लिए कोई कर्फ्यू नहीं रहेगा। रात को 9 बजे से सुबह पांच बजे तक अब नाइट कर्फ्यू रहेगा। अभी तक यह शाम 7 से सुबह 7 बजे तक था। अब राज्य सरकारों को फैसले लेने के लिए अधिक शक्ति दी गई है। अब राज्यों की सरकार तय करेंगी कि कैसे राज्यों में बसें और मेट्रो सेवाएं शुरू करनी है। नए दिशानिर्देश में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने प्रतिबंध हटा लिया है, लेकिन राज्य सरकार अपने स्तर पर पाबंदियां लगा सकती हैं और स्थिति के अनुसार सेवाएं शुरू कर सकती हैं। वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश में लागू लॉकडाउन का चौथा चरण का 31 मई आखिरी दिन था यह लॉकडाउन 18 मई से 31 मई तक के लिए लगाया गया था। स्कूल-कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान खोले जाने पर फैसला सरकार बाद में लेगी।मॉल भी चरणबद्ध तरीके से खुलेंगे, स्कूल-कॉलेज जुलाई से खोले जा सकते हैं, इसके लिए एसओपी स्वास्थ्य मंत्रालय जारी करेगा । अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, मेट्रो, सिनेमा, जिम, स्वीमिंग पूल, बार नहीं खुलेंगे।अंतर्राज्यीय परिवहन पर रोक नहीं होगी, राज्य चाहें तो इस परिवहन को नियंत्रित कर सकता है।65 साल से अधिक उम्र वाले लोग, गर्भवती महिलाएं, बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति और 10 साल से छोटे बच्चों को घर में ही रहना बेहतर होगा। कुल मिलाकर अनलॉक वन का सीधा सीधा सा अर्थ यह है कि अब सरकार आपको अपने बंधनों के तहत सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी सीधे-सीधे अब आप पर ही डाल रही है । या यूं कहिए कि सरकार का मानना है कि उसने 70 दिन का समय आपको कोरोनावायरस के साथ जीने की ट्रेनिंग देने के लिए लिया था । साथ ही साथ उसने आने वाली भयंकरतम परिस्थितियों का भी आकलन इस मध्य उन्होंने किया जिससे कि यदि यहां पर हालात बिगड़ते भी हैं तो भी पर्याप्त मात्रा में स्वास्थ्य सुविधाएं एवं अस्पताल आदि मुहैया कराई जा सके उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक लाख कोविड बैड तैयार कर लिए हैं। लेकिन मुख्य समझने की बात वही है कि इन सुविधाओं से कुछ लोगों की जान तो बच सकती है लेकिन उन्हें और उनके परिवारों को आर्थिक, भावनात्मक,व शारीरिक सारे कष्ट स्वयं झेलने होंगे । इसलिए बेहतर होगा कि हम अनलॉक 1 को स्वच्छंदता का पर्याय न मानें तथा कम से कम कोरोना निरोधक वैक्सीन आने तक हम सामाजिक दूरी बनाए रखें। अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें। स्वयं इसका शिकार न बनें और दूसरों को भी संक्रमण का शिकार न बनने दें। संक्रमित हो भी जाएं तो बजाए उसे छिपाने या कोरोनायोद्धा डॉक्टर व नर्स आदि से बचने के स्वयंआगे आकर उसे बताएं तब कहीं जाकर 135 करोड़ लोगों का भारत बच और बढ़ पाएगा। अन्यथा तो चीन से आया यह लाल वायरस सारे देश को लाल कर सकता है यदि दो शब्दों में ही अनलॉक वन के संदेश को समझा जाए तो वह है सावधान इंडिया, जागते रहो भारत। सरकार ने बेशक खिड़कियां खोल दी हैं, दरवाजों से ताला हटा दिया है। बाजारों से बंदिशें खत्म कर दी हैं लेकिन अब यह आपकी जिम्मेदारी है कि किसी भी हालत में कोरोना वायरस आपके घर में न घुस पाए। भले ही अनलॉक हुआ है पर मुंह पर मॉस्क का लॉक लगाकर रखिए दो गज की दूरी में खुद को लॉक रखिए और खाने पीने की वस्तुओं के ऊपर सैनिटाइजेशन का लॉक हटाने की भूल मत करिएगा । साथ ही साथ अपनी कॉलोनी, सोसाइटी, गली या मोहल्ले में किसी भी रूप में कोरोनावायरस के आने की सारी संभावनाएं पूरी तरह लॉक रखिएगा । अभी कुछ कष्ट तो होगा लेकिन जीवन बचेगा और देर सबेर किलर कोरोना को मारने के लिए दुनिया भर के अनुसंधानरत डॉक्टर, वैज्ञानिक इसको मारने वाला वैक्सीन ढूंढ ही लेंगे बस, तब तक ”सजग भारत, सावधान भारत” का मंत्र अपनाएंगे तो फिर मान भी बचेगा और हिंदुस्तान भी। ‌

– डॉ घनश्याम बादल
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार व वरिष्ठ स्तंभकार कार हैं )

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