गुरू गोबिंद सिंह महाराज के बड़े साहिबजादे अजीत सिंह की जयंती आज; प्रदेश में उत्सव

चंडीगढ़
11 फरवरी 2022

देश आज गुरू गोबिंद सिंह महाराज के बड़े साहिबजादे अजीत सिंह की जयंती मना रहा है। अजीत सिंह का नाम बहादुरी के लिए मशहूर है। वे छोटी उम्र में ही काफी बुद्धिमान थे। छोटी उम्र में बड़ी कुर्बानी के कारण सिख इतिहास उनका सम्मान बाबा अजीत सिंह के नाम से भी करता है।

प्रारंभिक जीवन

बाबा अजीत सिंह का जन्म 11 फरवरी 1687 को पांवटा साहिब में माता सुंदरी और गुरु गोबिंद सिंह के घर हुआ था। उनका पालन- पोषण आनंदपुर में हुआ, जहाँ उनकी शिक्षा में धार्मिक ग्रंथ, इतिहास और दर्शन शामिल थे। उन्होंने बाबा जीवन सिंह (भाई जैता) से घुड़सवारी और तलवारबाजी और तीरंदाजी की मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

ऐसे पड़ा अजीत नाम

जब बाबा अजीत सिंह 5 महीनों के हुए, तो उस समय दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह की पहाड़ी राजाओं से भंगानी के मैदान में घमासान की लड़ाई हुई थी। इस लड़ाई में गुरु के साथियों ने महान जीत हासिल की थी। जिसकी खुशी के कारण साहिबजादे का नाम अजीत सिंह रखा गया।

नूह के रंगहार

बमुश्किल 12 साल की उम्र में उन्हें अपना पहला सैन्य कार्य सौंपा गया था। एक मुस्लिम जनजाति, नबी नोह के रंगहारों ने उत्तर पश्चिमी पंजाब के पोथोहर क्षेत्र से आने वाली एक सिख संगत (मण्डली) पर हमला किया और उसे लूट लिया था। गुरु गोबिंद सिंह ने अजीत सिंह को 100 आदमियों की कमान में गांव भेजा, जो कि सतलुज नदी के पार आनंदपुर से थोड़ी दूरी पर था। अजीत सिंह 23 मई 1699 को गांव पहुंचे, लूटी गई संपत्ति की बरामदगी की और अपराधियों को दंडित किया।

स्मरणोत्सव

अजीतगढ़, पंजाब के सबसे बड़े शहरों में से एक, जो अपनी राजधानी चंडीगढ़ से सटा हुआ है, का नाम साहिबज़ादा अजीत सिंह, अजीतगढ़ (‘अजीत का घर’) की याद में रखा गया है। यह राज्य के जिले में स्थित है, जिसका नाम साहिबजादा अजीत सिंह नगर जिले के नाम पर भी रखा गया है।

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