विशेष रिपोर्ट : अब पहाड़ में भी मॉब लिंचिंग

देहरादून (देवपथ ब्यूरो )। दो-तीन दिन पहले उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का एक गांव सोशल मीडिया की सुर्खी बना रहा। मामला एक युवक-युवती के बीच का था। कारण जो भी हो लेकिन लड़की के गांव के लोगों का इस कदर खफा होकर युवक पिटाई कर हत्या करना ‘मॉब लिंचिंग’ नहीं तो क्या है?

हालांकि, इस प्रकरण में गांव के प्रधान समेत अन्य कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सोशल मीडिया पर मामला उछलते ही स्थानीय पुलिस ने भी त्वरित कार्यवाही की। इस प्रकार की घटनाएं पहाड़ में घटना विस्मय की बात है। पहाड़वासी पहाड़ जैसे शांत होते हैं मगर जब बिफरते हैं तो तब न आव देखते हैं न ताव।

अब तक भीड़-तंत्र द्वारा इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम देना अक्सर मैदानी इलाकों में ही सुना जाता रहा है। कानून की दृष्टि से भीड़ तंत्र द्वारा बिना वजह जाने इस तरह का कदम उठाना घोर अपराध है। भीड़ जब सामूहिक रूप से किसी बात को लेकर बिना सोचे-समझे आक्रोशित होकर किसी पर अपनी खुन्नस निकालती है तो उस समय कानून को भी नजरअंदाज कर देती है जो कि बाद में उन्हीं के गले की फांस बनता है।

छोटी-छोटी बातों को लेकर ऐसा करने से कहीं न कहीं उद्दंडता प्रदर्शित होती है। इस स्थिति में कम से कम जिसे दोषी ठहराया जा रहा हो उसकी भी बात सुनी जानी चाहिए। इस प्रकार की घटनाएं सामाजिक अपराध के तहत आती हैं। जिन्हें चाहें तो समाज आसानी से रोक सकता है।

ओम प्रकाश उनियाल
स्वतंत्र पत्रकार
MOB : 9760204664

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