हिन्दी दिवस पर विशेष : राष्ट्रभाषा हिन्दी

हिन्दी भारत की राजभाषा है, राष्ट्रभाषा है, ध्यान दें।
भारत के सभी प्रदेशों की संपर्क भाषा है, यह भी हम सभी ध्यान दें।।
अंग्रेज चले गए किंतु उनकी मानसिकता, भारत पर भारी है।
जो भी अच्छी अंग्रेजी जानता है, बोलता है, वह हिंदी पर भारी है।।

न्यायालयों में हिन्दी में आवेदन करें, स्वीकार होगा अधिवक्तागण समझें।
आदेश भी अब हिन्दी में होंगे, पहले भी हुए हैं, भारतवासी यह भी समझें।।
हिन्दी के सभी समाचारपत्र, अंग्रेजी थोपने का स्वभाव भी बंद करें।
व्यापारी भी अपनी दुकानों के बोर्ड, अंग्रेजी में लिखकर लगाने अब बन्द करें।।

हिन्दी हैं हम, हिन्दू हैं हम, भारतीय हैं हम, भारतवासी कब तक सोते रहेंगे।
मैकाले के बयान पर, अंग्रेजों की चाल पर आखिर आप कब तक रोते रहेंगें।।
संविधान निर्माता तो आधे अंग्रेज थे, संविधान हिन्दी में लिखकर बांटों अब।
गर्व से कहो हम हिन्दी हैं, हिन्दू हैं हम, पुरानी लीक को काटो गर्व से अब।।

हिन्दी भाषा माता है, भारत माता है, माँ से शत्रुता आया से प्रेम कब तक चलेगा।
हिन्दी भाषा विश्व भाषा बन चुकी है, हिन्दी प्रेमियों से द्वेष आखिर कब तक चलेगा।।
मैंने भी हिंदी दिवस मनाएँ हैं, हिन्दी आंदोलन चले हैं, परदेसी कब तक रहोगे।
भारतवासियों अब तो जागो, हिन्दी विरोधियों की बातें आखिर कब तक सहोगे।।

विदेशियों, विदेशी भाषा समर्थकों, विदेशी चाल चलन से सतर्क रहो।
विधर्मियों ने भारत को खिचड़ी बना दिया, धांधलेबाजों के कुतर्क मत सहो।।
सनातन देश है भारत, सनातन धर्म है अपना, विश्वगुरु देश यह भारत है।
अपना सम्मान है भारत, हिन्दी शान भारत की, विश्व उपदेश यह भारत है।।

– पं. रामेश्वर दत्त शर्मा “राम”
वरिष्ठ कवि एवं लेखक

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