पिता दिवस पर विशेष :- पिता की घुड़की में भी हित है

टीम डिजिटल : वैसे पिता के लिए भी एक दिन मनाया जाता है, यही तो आज के नए युग का दुर्भाग्य है कि एक पुत्र के पास जितने भी दिन हैं, उसकी जो भी कामयाबी है, वह सब पिता की देन है,उन सभी दिनों पर केवल और केवल पिता अधिकार है।बेशक माँ एक पुत्र-पुत्री को नौ महीने तक गर्भ में रखती हो,इसके लिए माँ की ममता का कोई जवाब नहीं लेकिन जो पिता अपने पुत्र-पुत्री को ताउम्र अपने दिल और दिमाग में रखता है, उसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते क्योंकि वह सब दिखता नहीं है लेकिन प्रकट होता है। पिता के प्यार की कीमत और उसके प्यार का अहसास क्या होता है,यह सब पिता के चले जाने के बाद सबको पता चलता है। हमेशा ध्यान रखिए कि माँ और बाप दोनों हमें समान प्रेम करते है| ऐसा नहीं है कि माँ ज्यादा प्यार करती है या पिता ज्यादा प्यार करते है।यकीन मानिए पिता मेरा सम्मान है,पिता मेरी ताकत है, पिता मेरी पहचान है। पिता एक कठोर व्यक्ति दिखाई जरूर देता है मगर होता नहीं है। पिता नीम के पेड़ की तरह कड़वा होता है परन्तु छाया ठंडी देता है।मेरा पिता जी मेरा सब कुछ है वो मुझे इतना डाटते है जिसकी कोई हद नहीं होती. कभी कभी तो लगता है कि पिता जी को डाटने के अलावा और कोई काम नहीं… और तो और जब भी में पढ़ता हूँ तब कभी नहीं देखते, लेकिन जिस दिन में सो जाता हूँ या खेलने लग जाता हूँ उसी दिन पकड़ा जाता हूँ और फिर मेरी जो पिटाई होती है बस उसका सुख मैं ही जानता हूँ क्योंकि उसी में मेरा भविष्य और भलाई छिपी हुई होती है,जो मुझे बाद में ध्यान आती है। अब देखिए ना जब भी मुझे कुछ भी चाहिए तब मुझे कभी कोई चीज मांगनी नहीं पड़ती पिता जी हमेशा से पहले से मेरी हर जरूरत का ध्यान रखते है वो कभी अपने लिए कुछ खरीदते कल तलक मैंने नहीं देखे और हमारे लिए कभी कुछ न लाए हो ऐसा कभी हुआ हो,मुझे याद नहीं। पिता जी ऐसा इसलिए करते हैं कि उनको अपनी हर ख़ुशी से पहले हमारी ख़ुशी दिखाई पड़ती है।अपनी हर जरूरत से पहले हमारी जरूरत पूरी करते है।मैं कितना भी बड़ा हो जाऊ उन्हें आज भी वहीं उनकी गोद में खेलने वाला बच्चा ही लगता हूँ। जब भी कहीं मुझे कही जाते देखते तो यही कहते है कि ध्यान से जाना और सीधे घर आना..। अरे!! अब मैं बच्चा नहीं रहा लेकिन वो मुझे हर तरह से परिपक्व देखना चाहते हैं।सच बात तो यह भी है कि इस पूरी दुनिया में अपने पुत्र-पुत्री का भला चाहने वाला इस धरा पर शायद ही कोई दूसरा हो और न केवल भला चाहने वाला बल्कि उसको साकार करने वाला भी। पिता के दिल की हालत सिर्फ पिता ही जानता है क्योंकि वो अपनी संतान के लिए किसी भी हद से गुजर जाने को तत्पर रहता है। मैंने अपनी जिंदगी में इतना जाना है कि अपने निजी शौक तो केवल और केवल पापा की कमाई से पूरे होते है,अपनी खुद की कमाई से तो सिर्फ गुजारा ही होता है।जितने भी मजे हैं वो सब हम पिता की सरपरस्ती में ही ले सकते हैं।लेकिन हम फिर भी गाहे-बगाहे पिता का दिल दुखा ही देते हैं,जो कि नहीं करना चाहिए और पापा फिर भी हमें माफ़ कर देते है। यकीन मानिए यदि पिता नहीं होते तो ये जिंदगी ही नहीं होती। मेरे पापा मेरी सर की छत है जो छत मेरे ऊपर किसी भी मुसीबत को नहीं आने देती।सच मानिए हम सब अपने पिता जी का अहसान कभी नहीं चुका सकते क्योंकि उन्होने मेरी लाख गलतियों के बावजूद मुझसे भरोसा नहीं तोड़ा और तो और मुझे सहारा ही दिया है।याद रखिए पिता की कृपा से हम हैं,हमारी कृपा से पिता नहीं।हम तो यह भी कहेंगें कि पिता के लिए एक दिन नहीं बल्कि हर दिन हो पिता के लिए हो।

कृष्ण कुमार निर्माण
करनाल, हरियाणा

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