स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट बना सरदर्द : स्मार्ट सिटी के कामों के चलते दून में चारों ओर उड़ रही धूल ही धूल

देहरादून। बीते कुछ महीनों से राजधानी दून को धूल ने अपने आगोश में ले रखा है। जिधर भी जाओ बस धूल, धूल और धूल का गुबार। इस धूल के गुबार ने लोगों का सडक़ों पर चलना ही मुश्किल नहीं कर रखा है अपितु दुकानदारों के सामने भी बड़ी समस्या पैदा कर रखी है। धूल से बचने के लिए कई दुकानदारों ने दुकानों के सामने सफेद पारदर्शी प्लास्टिक की पन्नियां लटका रखी है और शहर का यह हाल हुआ है कि स्मार्ट सिटी के कामों के चलते।

राजधानी दून जो केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी सूची का हिस्सा है, में शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए बीते एक साल से अनेक काम किए जा रहे हैं। इन कामों के लिए राजधानी दून की सडक़ों को कईकृकई मीटर गहराई तक खोदा जा रहा है। जिससे निकलने वाली मिट्टी काम होने तक इधर-उधर जमा रहती है तथा काम होने के बाद पुन: गड्ढे को भरने के काम आती है।

भले ही धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी के छिडक़ाव की व्यवस्था हो लेकिन यह व्यवस्था समुचित नहीं है। इन खुदी हुई सडक़ों पर पानी या तो इतनी अधिक मात्रा में डाल दिया जाता है कि सडक़ पर कीचड़ हो जाए या फिर इतना कम होता है कि धूल को दबा सके। वाहनों की आवाजाही के कारण भी यह उपाय अधिक समय तक कारगर नहीं होता है।

शहर के पल्टन बाजार से लेकर ईसी रोड से बुद्धा चैक आने वाले क्रॉस रोड तथा बुद्धा चौंक से आराघर तक जाने वाली सडक़ तक इस खुदाई के कारण धूल ही धूल का साम्राज्य नजर आ रहा है। खुदाई के कारण जगह जगह मिट्टी बढऩे से इन सडक़ों पर जगह-जगह वाहन हिचकोले खाते रहते हैं। वहीं कई बार फंस भी जाते हैं। ऐसी स्थिति में सडक़ों पर जाम की स्थिति आम हो गई है।

स्मार्ट सिटी के काम पूरे होने पर दूनकर को फायदा होगा वह तो बाद की बात है फिलहाल तो यह स्मार्ट सिटी धूल का एक ऐसा फूल बन चुका है जिसका रंग पूरी तरह से बदरंग हो गया है। दुकानदारों के लिए यह धूल बड़ी मुसीबत बनी हुई है और उनका अधिकांश समय और शत्तिफ इस धूल को झाडऩे में ही लग रही है।

दुकानदारों का कहना है कि जब से यह काम शुरू हुआ है उनका कारोबार आधा ही रह गया है। धूल के कारण सडक़ों पर चलना मुश्किल हो रहा है तथा सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है। लोगों का कहना है कि वह इस से तंग आ चुके हैं लेकिन पता नहीं इससे उन्हें कब निजात मिलेगी।

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