संजीव-नी : हां, हम आजाद हैं

हां, हम आजाद हैं।
क्या हुआ यदि देश मे अस्थिरता है ,
है क्या हुआ यदि देश मे अराजकता है,
हां, हम आजाद हैं।
क्या हुआ यदि देश मे राजनैतिक दो मुंहापन है
क्या हुआ यदि देश में ,
बिना विचारचार की सरकार है ,
क्या हुआ यदि स्कैंडल्स की भरमार है ,
क्या हुआ यदि सिर्फ भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है ,
हां, हम आजाद हैं।

क्या हुआ यदि खून की होली है ,
चीत्कार की दीवाली है
हजारों करोड की देनदारी है ,
नक्सलियों का घनघोर तांडव है ,
देश फिर गुलामी की कगार पर है ,
हां, हम आजाद हैं।

क्या हुआ देश मे पैदा होता हर बच्चा ,
सर से पैर तक क़र्ज़दार है ,.
हां हम आजाद हैं।

क्या हुआ देश मे कॅरोना का भयानक प्रहार है,
मौत की दर्दनाक ललकार है,
भूखे नौनिहाल, कर्मकार,
लाखों करोना से मौत के शिकार है,
लाचार बदहाल सरकार है,
हां, हम आजाद हैं।

– संजीव ठाकुर, अंतरराष्ट्रीय कवि,
चौब,कॉलोन रायपुर,9009415415

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