रिलायंस इंडस्ट्रीज का राइट्स इश्यू शेयर बाजार में हुआ लिस्ट, जानिये क्या होता है राइट्स इश्यू

डिजिटल डेस्क। रिलायंस इंडस्ट्रीज का राइट्स इश्यू शेयर बाजार में लिस्ट हो गया है। शेयर सोमवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई पर 690 रुपये पर लिस्ट हुआ और लिस्टिंग के बाद ही शेयर 710 रुपये तक पहुंच गया। यह 73.80 फीसदी के प्रीमियम पर लिस्ट हुआ है। मालूम हो कि राइट्स इश्यू का भाव 1,257 रुपये तय किया गया था। हालांकि विश्लेषकों को उम्मीद थी कि यह 720 रुपये से 760 रुपये  तक लिस्ट होगा। इसका बेस प्राइस 646 रुपये था, जिसके मुकाबले लिस्टिंग 44 रुपये अधिक के स्तर पर हुई। रिलायंस का 53,124 करोड़ रुपये का राइट्स इश्यू करीब डेढ़ गुना अधिक सब्सक्राइब हुआ था। पूंजी बाजार के नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की अनुमति बाद 15 जून 2020 यानी सोमवार से रिलायंस राइट्स इश्यू शेयरों का कारोबार शुरू हो गया है।

जारी किया गया आईएसआईएन नंबर
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों से अलग यह शेयर RELIANCEPP के नाम से शेयर बाजारों में लिस्ट हुए। इसके लिए एक अलग आईएसआईएन नंबर IN9002A01024 भी जारी किया गया है।

शेयरधारकों को किस्तों में चुकानी है रकम
राइट्स इश्यू के तहत शेयरधारकों को रिलायंस ने 15 शेयरों पर एक शेयर आवंटित किया हैं। 10 रुपये फेस मूल्य के शेयर का दाम 1247 रुपये प्रीमियम के साथ 1257 रुपये रखा गया है। आवेदन पत्र के साथ शेयरधारकों को 25 फीसदी यानी 314.25 रुपये चुकाने थे। बाकी बची रकम दो किस्तों में- अगले वर्ष मई में पहली 25 फीसदी अर्थात 314.25 रुपये और बाकी बची 50 फीसदी रकम 628.50 रुपये नंवबर में अदा करनी है। राइट्स इश्यू के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज में मुकेश अंबानी की हिस्सेदारी 12 साल के सर्वोच्च स्तर 49.14 फीसदी पर पहुंच गई है।

क्या है राइट्स इश्यू?
दरअसल पूंजी जुटाने के लिए शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियां राइट्स इश्यू लाती हैं। राइट्स इश्यू के जरिए कंपनियां अपने मौजूदा शेयरधारकों को ही अतिरिक्त शेयर खरीदने के लिए मंजूरी देती हैं। शेयरधारक एक निश्चित अनुपात में शेयर खरीद सकते हैं, जो कंपनी तय करती है। यानी शेयरधारक कंपनी की ओर से तय अवधि में राइट्स इश्यू के तहत शेयर खरीद सकते हैं। हालांकि इसके जरिए कंपनी के मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ता है।

राइट्स पेशकश के जरिए कंपनियां मौजूदा शेयरधारकों को घटी दरों पर नए शेयर खरीदने का अधिकार देती हैं, लेकिन उन पर ऐसा करने की बाध्यता नहीं होती। आरआईएल ने अंतिम बार 1991 में परिवर्तनीय ऋणपत्र जारी कर जनता से धन जुटाया था।

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