आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने सुनने और शरीर संचालन से अक्षम दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मौजूदा सहायक उपकरणों को नवीनतम तकनीक से अधिक कार्य सक्षम बनाया

चेन्नई : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के शोधकर्ता सुनने और शरीर संचालन से अक्षम दिव्यांगों को खुद संवाद सक्षम बनाने और उन्हें बेहतर जीवन देने के लक्ष्य से पहले से विकसित पहनने वाले सहायक उपकरणों को नवीनतम तकनीकों के साथ अधिक उपयोगी बना रहे हैं। पहने जाने वाले इन सेंसरों में इंटरनेट ऑफ थिंग्स की नवीनतम सेंसर तकनीकों का इस्तेमाल होगा।

आईआईटी मद्रास के इन प्रोजेक्ट को सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (एसपीएनआई) अपने सीएसआर के तहत आर्थिक सहयोग दे रही है। ये उपकरण सेंटर फॉर रिहैबिलिटेशन इंजीनियरिंग एंड असिस्टिव टेक्नोलॉजी (क्रिएट) में विकसित किए जा रहे हैं जो आईआईटी मद्रास की एक बहु-विषयी ट्रांसलेशनल रिसर्च और शिक्षा की खास पहल है। शोधकर्ताओं ने गैर सरकारी संगठनों और सभी के समावेश वाले स्कूलों के साथ संवाद के दौरान इसकी परिकल्पना की थी।

भारतीय समाज की एक बड़ी मांग अलग-अलग क्षमताओं वाले लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए कम लागत पर स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का विकास करना रहा है। क्रिएट ने इसी लक्ष्य से कार्यारंभ किया है।

क्रिएट-आईआईटी मद्रास के प्रमुख और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी मद्रास के फैकल्टी प्रो. अनिल प्रभाकर ने ऐसे सहायक उपकरणों के स्वदेशी विकास को अहम् बताते हुए कहा, “कम कीमत पर और टिकाऊ सहायक उपकरण और सिस्टम उपलब्ध नहीं होने के कारण सुनने से अक्षम दिव्यांग विकास की मुख्यधारा और समावेशपूर्ण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। और आयात किए गए ऐसे उपकरणों का खर्च अधिकतर लोग नहीं जुटा जा सकते हैं।’’

इस सिलसिले में प्रो. अनिल प्रभाकर ने कहा, ‘‘प्रोडक्ट की लागत कम हो और यह 5000 भारतीय रुपये से कम में उपलब्ध हो इसका ध्यान रखा गया है ताकि यह कम दाम पर बुनियादी काम करने की सक्षमता दे। प्रौद्योगिकी के विकास और कम लागत के माइक्रोकंट्रोलर और सेंसर आने और उपलब्ध होने से हम कम लागत का यह अभूतपूर्व उपकरण तैयार कर पाए।”

क्रिएट ने सुनने और शरीर संचालन से अक्षम दिव्यांगों के लिए दो अहम् प्रोजेक्ट क्रमशः ‘वाइब’ और आईजेस्ट विकसित किए हैं। दोनों डिवाइस एम्बेडेड सिस्टम हैं जिनके आधार पर आईओटी और एमएल से विकसित सहायक उपकरण (पहनने के लिए) पेश किए जाएंगे। इनमें रिचार्जेबल बैटरी होगी और ब्लूटूथ के जरिये मोबाइल फोन से संवाद करना मुमकिन होगा।

सीएसआर के इन प्रोजेक्ट के दूरदर्शी प्रभाव के बारे में सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के कंपनी सचिव, अनुपालन अधिकारी और सीएसआर प्रमुख श्री राजकुमार बिदवाटका ने विस्तार से बताया, “सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (एसपीएनआई) की संस्कृति का एक अनिवार्य पहलू सभी का समावेश है। इस प्रोजेक्ट के लिए आईआईटी मद्रास को सहयोग देने पर हमें गर्व है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दिव्यांग समुदायों की जरूरतें बहुत आसानी से कम खर्च पर और सुलभतया पूरी हों। एसपीएनआई में हम ने ऐसे कार्यों में सहयोग देने का लक्ष्य रखा है जिनका कथित समुदायों को ऐसे नवाचारों से ठोस लाभ मिले।’’

‘वाइब’ पहनने के लिए विकसित उपकरण है जो सुनने से अक्षम दिव्यांगों के लिए उनके चारों ओर की ध्वनि पर कम्पन्न करता है। वाइब में अलग-अलग कई तरह के साउंड पैटर्न हैं जिनकी पहचान माइक्रोफोन और वॉयस रिकग्निशन मॉड्यूल से होती है। वाइब ऐसे दिव्यांगों को किसी खास ध्वनि जैसे दरवाजे की घंटी, अलार्म या रोते हुए बच्चे के बारे में सचेत कर देगा। यह घड़ी की तरह कॉम्पैक्ट और पहनने में आसान होगा। यह पहले से निर्धारित आसपास की ध्वनियों के लिए कम्पन्न से सूचना देने का आसान उपकरण है जिसमें ऐसी प्रत्येक ध्वनि विशिष्ट कम्पन्न पैदा करती है और एल ई डी के ब्लिंक करने से यूजर सचेत हो जाता है।

आईजेस्ट सेरेब्रल पाल्सी के मरीजों के लिए संवाद का वैकल्पिक और संवाद संवर्धन का उपकरण है। यह सीमित शरीर संचालन वाले लोगों के इशारे को समझेगा और स्मार्टफोन के माध्यम से उनका ऑडियो आउटपुट देगा। इसका उद्देश्य सेरेब्रल पाल्सी ग्रस्त लोगों के बोलने और शरीर संचालन की समस्या का समाधान करना है।

आईजेस्ट बाजार में उपलब्ध फिटनेस सेंसर से प्रेरित है और इसे इनर्शियल मोशन यूनिट से डिजाइन किया जाएगा। सेरेब्रल पाल्सी के मरीज सामान्य लोगों की तुलना में बहुत धीमी गति से शरीर संचालन कर सकते हैं और बार-बार यह करना कठिन हो सकता है। इसलिए आईजेस्ट बाजार में उपलब्ध माइक्रोकंट्रोलर को केंद्र मंे रख कर डिजाइन किया जाएगा जो आईओटी उपकरणों को मशीन लर्निंग (एमएल) की क्षमताएं प्रदान करते हैं।

पिछली जनगणना के अनुसार भारत की 20 प्रतिशत आबादी शरीर संचालन करने में अक्षम थी। ऐसे व्यक्ति अक्सर ऑक्युपेशनल थिरैपी के लिए जाते हैं। इसके अलावा कुछ लोगों को खास वजहों (मांसपेशियों का खिंचना, या उठने-बैठने के गलत तरीके के कारण) से फिजियोथेरेपी की आवश्यकता होती है। आईजेस्ट बड़ी संख्या में मौजूद ऐसे लोगों की गंभीर समस्या दूर करेगा।

सेरेब्रल पाल्सी ग्रस्त लोगों में शरीर संचालन की सीमा बोलने में कठिनाई और खुद संवाद करने में असमर्थता के रूप में सामने आती है। सेरेब्रल पाल्सी के जन्मजात मामले लगभग 0.3 प्रतिशत हैं लेकिन ये 15-20 प्रतिशत शारीरिक अक्षमता वाले बच्चों की इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।

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