शोध गीत : गोबर के दीये यह पांच

भारत की चिकनी मिट्टी की शान बढ़ाएंगे, गोबर के दीये यह पांच।
आविष्कार की नई शोध को चमकाएंगे, गोबर के दीये यह पांच।।
इस दिवाली पर पूजन में सम्मिलित करलें, गोबर के दीये यह पांच।
इनका भी पूजन कर ले मिट्टी के दीयों के संग, गोबर के दीये यह पांच।।

मंत्राभिसिक्त हो, प्राण प्रतिष्ठित हो जाएंगे गोबर के दीये यह पांच।
जैसे मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठित प्रस्तर की समस्त प्रतिमाएं, हो जाएंगे दीपक यह पांच।।
चिकनी मिट्टी के दीपक जैसे प्रतीक बन गए हैं मिल जाएंगे उनमें दीये यह पांच।
नई शोध है, नया कार्य है अकस्मात बन गए गोबर के दीये यह पांच।।

कोरोना जैसी महामारियों को मार भगा देंगे, दिवाली के दीपक यह पांच।
असंगतियों को विश्व व्याप्त है जितनी भी, नष्ट करेंगे गोबर के दीये यह पांच।
विश्व शांति का सीधा मार्ग दिखाएंगे यह तय है, गोबर के दीये यह पांच।
नई आस्था को नया रूप दे जाएंगे यह तय है, गोबर के दीये यह पांच।।

अमरीका में जैसे चुनी गई हैं, भारतीय मूल की कमला हैरिस यह बात है सीधी सांच।
ऐसे ही झोपड़ी के निर्धन बोधराम का सम्मान बढ़ाएंगे गोबर के दीये यह पांच।।
अगले चुनाव में राष्ट्रपति बन जायेगीं कमला हैरिस, आशीष दे रहे गोबर के दीये यह पांच।
बोधराम का नाम भी शोधकर्ताओं में होगा जल्दी ही कह रहे गोबर के दीये यह पांच।।

गिनीज बुक में जल्दी ही होगा नाम बोधराम का यह तय करते यह दीपक पांच।
सब कुछ कर सकता है झोपड़ी का निर्धन, संदेश दे रहे हैं गोबर के दीये यह पांच।।
देर नहीं लगती, दिलवा देते हैं सम्मान इसी भांति जग में गोबर से निर्मित दीये यह पांच।
इस दीवाली में प्राण प्रतिष्ठित हो जाएंगें सुनलो, गोबर से अकस्मात बने दीपक यह पांच।।

– पं रामेश्वर दत्त शर्मा “राम”
उपाख्य : राम बाबा
देहरादून, उत्तराखंड।

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