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सिबिल स्कोर अपडेट का नया नियम, RBI ने तय किए इतने दिन

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सिबिल स्कोर अपडेट का नया नियम, RBI ने तय किए इतने दिन

सिबिल स्कोर की अपडेट प्रक्रिया में बदलाव से अब ग्राहकों को और प्रभावी सेवा मिलेगी। पहले जहां इसके अपडेट होने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, अब यह केवल कुछ ही दिनों में पूरा होगा। इस नए सुधार(cibil score rules update) से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि किसी भी शिकायत का समाधान जल्दी किया जाएगा, जिससे ग्राहकों का विश्वास और ज्यादा बढ़ेगा। यह कदम एक नई और सुधारीकरण प्रक्रिया की शुरुआत है, जो बैंकिंग सेवाओं को और अधिक आसान और प्रभावी बनाती है।

क्या है आरबीआई का नया अपडेट 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में सिबिल स्कोर (Credit Score) को लेकर कई नए नियम बनाए हैं, क्योंकि इस विषय पर कई शिकायतें मिल रही थीं I इन नियमों का उद्देश्य लोगों को बेहतर तरीके से लोन प्राप्त करने में मदद करना हैI यदि आपका सिबिल स्कोर अच्छा (good cibil score) है, तो लोन लेना आसान हो जाता हैI 

इसके लिए सबसे जरूरी बात यह है कि आप अपनी ईएमआई का समय पर भुगतान करें और कभी भी डिफॉल्ट (loan default effects) ना करें I अगर आप समय पर पेमेंट नहीं करेंगे, तो आपका सिबिल स्कोर खराब हो सकता हैI आरबीआई ने इस पर एक खास निर्देश भी जारी किया है, जो यह सुनिश्चित करता है कि लोगों को अपने स्कोर को सही रखने के लिए बेहतर दिशा मिल सकेI

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इतने दिन में होगा सिबिल स्कोर अपडेट 

अब बैंक और वित्तीय संस्थान को ग्राहकों के लोन और भुगतान से जुड़ी जानकारी को जल्दी अपडेट करनी होगी। हर 15 दिन (credit report) में ग्राहकों का क्रेडिट स्कोर रिवाइज होगा, जिससे उन्हें अपनी क्रेडिट स्थिति का ताजगी से पता चलेगा। यह नया नियम 1 जनवरी 2025 से लागू हो चुका है। सभी क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस (credit institutions) की संबंधित संस्थाओं को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ग्राहक की जानकारी समय पर संबंधित एजेंसियों CIC को भेजें। इससे ग्राहकों को लोन प्राप्ति में आसानी होगी।

सिबिल स्कोर चेक करने की सूचना कैसे आएगी

केंद्रीय बैंक ने निर्देश दिया है कि जब भी कोई क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी, बैंक, एनबीएफसी (Non-Banking financial Company) या अन्य कोई वित्तीय संस्था ग्राहक की वित्तीय स्थिति की जांच करती है, तो ग्राहक को इसकी सूचना देनी जरूरी होगी। यह जानकारी एसएमएस या ईमेल के माध्यम से दे सकते हैं।

इसके पीछे का उद्देश्य है कि ग्राहकों को उनकी जानकारी के बारे में पारदर्शिता प्रदान करना, क्योंकि इससे पहले इस प्रक्रिया को लेकर कई शिकायतें (complaint against cibil score) सामने आई थीं। यह कदम ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए उठाया गया है।

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रिक्वेस्ट रिजेक्ट होने का बताना होगा कारण

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve bank of India) ने निर्देश दिए हैं कि जब किसी ग्राहक की लोन या क्रेडिट की मांग अस्वीकृत होती है, तो उसे स्पष्ट कारण ग्राहक को बताना होगा। इससे ग्राहक को यह समझने में मदद मिलेगी कि उसकी मांग को स्वीकार क्यों नहीं किया गया। इसके साथ ही, अस्वीकृति के कारणों की सूची तैयार करके सभी संबंधित संस्थाओं को भेजना अनिवार्य किया गया है। इस कदम का उद्देश्य (cibil score rules change) ग्राहकों को पारदर्शिता और सही जानकारी प्रदान करना है, ताकि वे अपनी स्थिति को बेहतर ढंग से समझ सकें।

फुल क्रेडिट रिपोर्ट मिलेगी फ्री में

भारतीय रिजर्व बैंक ने निर्देश दिया है कि वित्तीय संस्थाएं अपने उपयोगकर्ताओं को हर वर्ष बिना किसी शुल्क के पूरा वित्तीय इतिहास (how to get credit history) और स्कोर प्रदान करें। इसके लिए कंपनियों को अपनी ऑनलाइन साइट पर एक विशेष लिंक देना अनिवार्य है। इस सुविधा से उपभोक्ता अपनी वित्तीय स्थिति और क्रेडिट हिस्ट्री (credit history) की जानकारी पा सकेंगे, जो उन्हें अपने वित्तीय फैसले लेने में मदद करेगी। यह कदम उपभोक्ताओं को पारदर्शिता और बेहतर वित्तीय योजना बनाने में सहायक होगा।

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देनी होगी डिफॉल्ट की जानकारी 

भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार, यदि कोई ग्राहक कर्ज़ चुकाने में सक्षम नहीं होता, तो उसे सूचित करना जरूरी है। इसके लिए कर्ज़ देने वाली संस्थाएं एसएमएस या ई-मेल (loan default) के माध्यम से जानकारी भेज सकती हैं। इसके अलावा, हर बैंक और लोन देने वाली संस्था को एक प्रमुख अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो ग्राहकों की वित्तीय समस्याओं को हल करेगा। यह कदम ग्राहकों को बेहतर सहायता और समस्याओं का समाधान प्रदान करेगा।

अब केवल 1 महीने में होगी समस्या हल 

यदि कोई वित्तीय संस्था 30 दिनों के भीतर ग्राहकों की समस्याओं का समाधान नहीं करती, तो उसे हर दिन के हिसाब से 100 रुपए जुर्माना देना होगा। लोन देने वाली संस्थाओं को 21 दिन (credit correction time limit) और क्रेडिट ब्यूरो को 9 दिन का समय मिलेगा। यदि बैंक ने तय समय में जानकारी नहीं दी तो उसे जुर्माना देना होगा। इसके बाद, अगर क्रेडिट ब्यूरो (rules for credit bureau)ने तय समय में समस्या का समाधान नहीं किया, तो उसे जुर्माना भरना पड़ेगा। यह व्यवस्था समय पर समाधान सुनिश्चित करने के लिए है।

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