आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम के 10वें दीक्षांत समारोह में 380 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई
आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम के 10वें दीक्षांत समारोह में 380 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई

चेन्नई : भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी डिजाइन और विनिर्माण संस्थान कांचीपुरम (आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम) के 10वें दीक्षांत समारोह में कुल 380 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। यह केंद्र सरकार का ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ है जो तमिलनाडु में चेन्नई के निकट अवस्थित है। संस्थान के दीक्षांत समारोह में 6 पीएचडी, 53 एम.टेक, 110 डुअल डिग्री और 211 बी.टेक डिग्री प्रदान की गई है।

संस्थान की स्थापना एक विशिष्ट जनादेश के साथ की गई थी जिसका लक्ष्य आईटी और आईटी-सक्षम डिजाइन और निर्माण की शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता प्राप्त करना है। आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम कथित जनादेश के अनुसार मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता के साथ यूनिक डिजाइन-केंद्रित इंजीनियरिंग प्रोग्राम पेश करता है। संस्थान ने उद्योग जगत की मांगों को पूरा करने के लिए ‘स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग’ में बी.टेक और एम.टेक प्रोग्राम भी शुरू किए हैं।

आज (10 सितंबर 2022) फिजिकल रूप में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि श्रीमती निर्मला सीतारमण, माननीय वित्त और कॉर्पाेरेट कार्य मंत्री, भारत सरकार के साथ प्रोफेसर एस सदगोपन, अध्यक्ष, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम, प्रो डीवीएलएन सोमयाजुलु, निदेशक, आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम, संस्थान के फैकल्टी, कार्मिक, विद्यार्थी और उनके माता-पिता भी मौजूद थे।

पूरा दीक्षांत समारोह देखने के लिए लिंक नीचे दिया गया है - https://youtu.be/fFyRDpxpbGM

Convocation Booklet can be viewed and downloaded from the following link - https://drive.google.com/file/d/13Mcy2AI6uWVBeC4D5MmKlt8xZb9bjLwC/view

माननीय वित्त और कॉर्पाेरेट कार्य मंत्री ने संस्थान सभागार की आधारशिला रखी और एआई, आईओटी और रोबोटिक्स केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने एक स्टूडेंट वॉल ऑफ ऑनर का भी अनावरण किया जिसमें पिछले सभी दीक्षांत समारोहों के स्वर्ण पदक विजेताओं के विवरण दर्ज हैं।

Addressing the convocation, Smt. Nirmala Sitharaman, Hon’ble Minister of Finance and Corporate Affairs, Government of India, said, “I want to underline the fact it is this India’s higher education which has contributed to the best of company executives. Globally, 58 top-notch company CEOs are Indian in origin and India-education and they are in 11 such companies that are multinational, whose collective revenue is over 1 trillion and 4 trillion in turnover. Therefore, they could not have had less education than others. In fact, they have had better education from our higher education institutions. But that is not to say nothing needs to be done. We have to constantly keep upgrading the teaching-learning experience and therefore it is important for us to be continually on the top.”

Smt. Nirmala Sitharaman added “25 per cent of all start-ups in Silicon Valley are managed by people of Indian origin. India, of course, now has 100 unicorns because the start-up ecosystem has built up so well. Their market value of these companies are US$ 250 billion and they have collectively raise from the market $63 billion. Even as some of you would want to seek jobs, I am those for those of you who want to become entrepreneurs and create jobs for other, it is not a worrisome world. There may be health risk but it is possible for you all to become entrepreneurs.”

Noting that several industries were on the Board of the Institute, Smt. Nirmala Sitharaman added, “What we need to do know is to make sure we understand what the Industry needs and be able to manufacture for ourselves and the world. That is why Industry leaders sitting on the boards of such wonderful institutions which draw talent and bring in the best of skills and abilities and which have rigourous teaching-learning experiences is very important. Because, we need to produce our students to be capable of getting into industry, which serves India’s development goals. This Synergy is now, I think, much achieved by most of the institutions because Government speaks to them and they give inputs.

Further, Smt. Nirmala Sitharaman said, “According to UN Population Statistics of 2019, the Working Age population of India will overtake China in 2028, meaning we will have more working-age population people in India by 2028 even much more than China. And that working age population will reach 65 percent of our population by the year 2036 and it will stay at that level of 65 percent till 2047...If your working age population, meaning those who have graduated from institutions like this, contribute to about 65 percent of the entire population, the productivity, the contribution to the GDP are going to be much higher than what the world can see today.”

संस्थान उद्योग जगत की जरूरतों को पूरा करने के अनुरूप प्रोग्राम शुरू करने में सबसे आगे रहा है। संस्थान के कुछ यूनिक प्रोग्रामों में शामिल हैं कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग में बी.टेक के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में विशेषज्ञता और सीएसई में एम.टेक के साथ डेटा साइंस और एआई में विशेषज्ञता।

इस अवसर पर आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. एस. सदगोपन ने कहा, ‘‘हमारे संस्थान ने 2007 में सामान्य शुरुआत करते हुए पिछले 15 वर्षों में लगभग 1600 विद्यार्थी, 80 फैकल्टी और 50 प्रशासनिक और तकनीकी कर्मचारी शामिल कर उल्लेखनीय प्रगति की है! किसी शैक्षिक संस्थान का उद्देश्य कुशल मानव संसाधन का विकास करना है और मुझे खुशी है कि संस्थान ने अपने स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर के शैक्षिक और शोध प्रोग्रामों की संख्या और विविधता दोनों में वृद्धि की है।

प्रो. एस. सदगोपन ने कहा, ‘‘हम में से अधिकतर लोगों के लिए यह अवसर एक सामान्य वजह से विशेष महत्वपूर्ण है: महामारी के ढाई साल की अवधि के बाद पहली बार पूरी तरह व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया है। मुझे विश्वास है कि सभी स्नातक, उनके परिवार के सदस्य और संस्थान के अन्य लोग व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ समारोह में भागीदार से प्रसन्न होंगे। हम दीक्षांत समारोह के आयोजन में शिक्षा मंत्रालय और राज्य प्रशासन के सहयोग के प्रति आभारी हैं।’’

कैम्पस प्लेसमेंट और इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी

आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम के निदेशक प्रो डीवीएलएन सोमयाजुलु ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा, “संस्थान के क्रिस्टल जुबली वर्ष में हम (आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम) ने 97 प्रतिशत प्लेसमेंट दर्ज किया है जिसमें सर्वाधिक सीटीसी सालाना 32 लाख रु. और औसत सीटीसी 10.06 लाख रु. है। मुख्य रूप से अमेज़ॅन, एएमडी, एरिक्सन, गूगल, एलएंडटी, मैथवक्र्स, माइक्रोचिप, सैमसंग और जूम इंडिया आदि ने हमारे संस्थान के विद्यार्थियों को नियुक्त किया है।

प्रो डीवीएलएन सोमयाजुलु ने बताया, “हम ने 2021-22 में बतौर प्रायोजित अनुसंधान अनुदान 4.39 करोड़ रुपये प्राप्त किए। इसके साथ अनुसंधान और परामर्श के लिए कुल 26.14 करोड़ रु. का वित्त पोषण प्राप्त कर चुके हैं। मैकेनिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग डीएसटी (भारत सरकार) से लगभग 2.30 करोड़ का एफआईएसटी अनुदान प्राप्त कर चुके हैं। राष्ट्र और राज्य स्तर के विभिन्न स्काॅलरशिप के अलावा सेंट-गोबेन इंडिया ने संस्थान की 40 बी.टेक छात्राओं को स्काॅलरशिप देने के आठ वर्षीय करार पर हस्ताक्षर किया है। तीन युवा फैकल्टी मेंबरों को डीएसटी के तहत विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड के एसआईआरई फेलोशिप पर पूरी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों जैसे स्टैनफोर्ड युनिवर्सिटी में उच्च स्तरीय शोध करने का अवसरे दिया गया है।

प्रो डीवीएलएन सोमयाजुलु ने कहा, ‘‘हमारे संस्थान की स्थापना राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में की गई। पिछले 15 वर्षों में संस्थान में हम ने इंजीनियरों की एक नई पीढ़ी तैयार की है जो मूल रूप से इंजीनियरिंग के साथ डिजाइन, व्यवसाय, मानविकी और प्रबंधन की अवधारणाओं को एकीकृत करने में कुशल हैं। हमारे स्नातक पाठ्यक्रम के डिजाइन का आधार विद्यार्थियों को प्रशिक्षित डिजाइनर बनाता है जो कुशल प्रोडक्ट डेवलपर बनते हैं।’’

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