उत्तराखंड की राजनीती दिन-प्रतिदिन लेती नया मोड़, सरिता आर्य भाजपा में शामिल

देहरादून। भाजपा ने कांग्रेस को झटका देते हुए सरिता आर्य को पार्टी की सदस्यता दिलाई। सरिता आर्य ने आज दोपहर भाजपा मुख्यालय पहुंचकर भाजपा की सदस्यता ली। विधानसभा चुनाव 2022 में अभी तक नैनीताल सीट के लिए कांग्रेस में टिकट की दावेदारी कर रही महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरिता आर्य ने कांग्रेस के प्रत्याशियों की सूची जारी होने से पहले ही पाला बदल लिया है। वह भाजपा में शामिल हो गईं।

सरिता आर्य हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और उनके बेटे एवं नैनीताल के पूर्व विधायक संजीव आर्य से नाराज थी। वह नैनीताल सीट से चुनाव लड़ना चाहती हैं। कांग्रेस में उन्होंने टिकट की दावेदारी भी नैनीताल सीट से की थी, लेकिन कांग्रेस में संजीव आर्य के नाम की चर्चा चल रही थी। ऐसे में सरिता आर्य को पार्टी बदलने में ही ज्यादा सही लगा। हाल ही में उन्होंने भाजपा प्रदेश चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी से उन्होंने मुलाकात भी की थी।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलाई।

इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। सरिता आर्य के साथ ही महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष रेखा बोहरा व प्रदेश महामंत्री वंदना गुप्ता ने भी कांग्रेस के अंदर महिलाओं की उपेक्षा किए जाने के चलते भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। सरिता आर्य पहले भी कह चुकी थी कि अगर बीजेपी मुझे टिकट देगी तो मैं कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो जाऊंगी। उन्होंने वैसा ही किया, जैसा कहा था। वहीं कांग्रेस ने भी सरिता आर्य पर कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी के सभी पदों से निष्कासित कर दिया है।

दरअसल, कांग्रेस में टिकटों को अंतिम रूप दिए जाने की कवायद के साथ ही असंतोष मुखर होने लगा। टिकट कटने की जानकारी मिलने पर सरिता आर्य ने विद्रोही तेवर अपनाते हुए भाजपा में जाने के संकेत दिए थे। शुक्रवार देर रात्रि उन्होंने भाजपा के प्रदेश चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी से मुलाकात की।

इसके बाद उन्होंने कहा कि टिकट मिला तो उन्हें भाजपा में जाने से गुरेज नहीं होगा। वहीं, सोमवार की सुबह वह भाजपा मुख्यालय में पहुंची और पार्टी का दामन थाम लिया। सरिता आर्य कुमाऊं मंडल में नैनीताल सुरक्षित सीट से 2012 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुई थीं। 2017 के चुनाव में वह हार गईं थीं। चुनाव के मौके उनकी नाराजगी से पार्टी के माथे पर बल पड़े रहे।

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