अहसास है कविता

कभी चेत के कबूतरों सी
शांत है कविता
कभी व्याकुल चिड़ियों का
शोर है कविता

कभी आसमान की आँखें बन
पतंगों में नजर आती है
कभी लंका से अस्सी होते हुए
घाटों से गुजरती जाती है

कभी हमारे शहर रहती है
कठौता झील से गोमती नदी तक
कभी हमारे किरदार का
अन्तिम सत्य है कविता

एक कविता है मेरे अन्दर
जो समन्दर की लहर सी दिखती है
जिसे मैं लिख नहीं पाता
पर हर रोज़ जीता हूँ
हमसे रूबरू एक अहसास है कविता।

प्रफुल्ल सिंह (बेचैन कलम)
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मो. 8564873029
ईमेल. prafulsingh90@gmail.com

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