काव्य स्वतंत्रता दिवस : बढते चलो

ऐ वतन के नौजवान
बदलो अपने निशान
बढ़ते चलो बढ़ते चलो
बुला रहा है आसमान।।

स्वतंत्र भारत की स्वतंत्रता
सभी को मिले है समान
बढते चलो बढते चलो
छोडकर अपने निशान।।

सरहद पर सिपाही डटे
खेती में डटे है किसान
बढते चलो बढते चलो
पूरी करो अपने अरमान।।

उडने की कोशिश करो
पंख खुद लग जाएंगे
बढने बढाने नियत होगी
मंजिल खुद मिल जाएंगे ।।

मतलबी जहां के दुश्मन
सरहद के उसपार बैठे
जागते रहो जागते रहो
अंदर न घुस पाएंगे ।।

आशुतोष
पटना बिहार

Leave A Reply

Your email address will not be published.