कविता : जवान जबान

मन की मनोव्यथा सुना
दिल के भेद बता देना
आंसूओं को आवाज
व होठों को आभास देना

जबान की जवानी होती हैं|

लक्ष्य को राह देना
काम पर ध्यान देना
मजबूरी में मौन
व भाव का गौण होना

जबान की जवानी होती हैं|

मन मचल करके
भावना को कुचलकर
बात के लहजे में रहना
व बिना बोले सब कह देना

जबान की जवानी होती हैं|

विचारों में तालमेल करके
दो लब्ज़ प्रेम से कहके
वचनों की अहमियत
व जीवन पर जीभ का प्रभाव होना

जबान की जवानी होती हैं|

लेखक – संजय कुमार
पता- सांचौर जालोर (राज.)
मो. 9982739488

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