कविता : आओ करें योग

आओ करें योग, आओ करें योग
अपने तन से, अपने मन से दूर करें कुरोग
आओ करें योग……

साँसों का भरना और निकलना है प्रणायाम
दिल, दिमाग का है ये सबसे अच्छा व्यायाम
भस्त्रिका, भ्रामरी और अनुलोम- विलोम
करते ही पुलकित हो जाये जसे रोम-रोम
आओ करें योग…….

कपालभाति कर, तन और चित्त हो जाता शान्त
ईश्वर से संयोग हो जाता, खुद लग जाता ध्यान
योग है बहुत फायदेमंद, जैसे मूल और कंद
मिट जाए इससे मन के सारे कलुष और द्वदं
आओ करें योग……..

इसमें न कोई खर्चा और न कोई झझंट
बीमारी को दूर करे ये बिना दवाई फटफट
आयुर्वेद और योग का जब लहरायेगा परचम
सम्पूर्ण विश्व में भारत का मान बढ़ायेगें हम
आओ करें योग, आओ करें योग

– स्वरचित
अरुणा राजपूत “राज”
शिक्षिका
हापुड़ (उ०प्र०)

Leave A Reply

Your email address will not be published.