देवस्थानम बोर्ड में कोई भी कमी बताने को तैयार नहीं : त्रिवेंद्र रावत

हरिद्वार। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मठ, मंदिर और धामों के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था होती है। श्रद्धालुओं के हित को देखते हुए ही देवस्थानम बोर्ड बनाया गया था। देवस्थानम बोर्ड में कोई भी एक कमी बताने को तैयार नहीं है। इसमें केवल राजनीतिक लोगों ने जनता को बरगलाने का प्रयास किया है।

इसमें चंद लोगों के स्वार्थ जुड़े हुए हैं। ये बातें उन्होंने कनखल स्थित जगद्गुरू शंकराचार्य आश्रम में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि जब हम देवास्थनाम बोर्ड की बात करते हैं तो 125 करोड़ हिन्दू हमारी निगाह में होते हैं। देवस्थानम बोर्ड से इससे पहले भी बदरी, केदार समिति एक ऐक्ट के तहत काम करती थी। इसमें बदरीनाथ और केदारनाथ के साथ ही 47 अन्य मंदिर शामिल थे। बाद में यमुनोत्री और गंगोत्री धाम जोड़े गए।

उन्होंने कहा कि चार मंदिरों की ओर से लिखकर दिया गया था कि उन्हें देवस्थानम बोर्ड में जोड़ा जाए। जिसके बाद उन्हें जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि देवस्थानम बोर्ड बनाने का उद्देश्य केवल सुरक्षित, व्यवस्थित यात्रा अपने यात्रियों को प्रदान करना था। लेकिन आज तक कोई एक कमी बताने को तैयार नहीं कि बोर्ड में ये कमी है। कहा कि बीच में ये मामला शांत हो गया था। अब चुनाव की शुरुआत होने की बात सामने आई तो फिर से बोर्ड का मुद्दा उठाना शुरू दिया।

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