भारत के साथ डिप्लोमैटिक तरीके से सीमा का समाधान करना चाहता है नेपाल

काठमांडू। नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने मंगलवार को कहा कि हम भारत से बातचीत करना चाहते हैं। हमारे पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। विदेश मंत्री का यह बयान संसद में संविधान संशोधन पर चर्चा से कुछ घंटे पहले आया। उन्होंने कहा कि हम बुद्ध की जमीन से हैं। भारत के साथ डिप्लोमैटिक तरीके से सीमा का समाधान करना चाहते हैं। नेपाल की संसद में मंगलवार को संविधान संशोधन बिल पर चर्चा होनी है। संविधान में नए नक्शे को शामिल किया जाएगा। नेपाल ने नए नक्शे में भारत के तीन इलाकों लिपूलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना क्षेत्र बताया है। इस बिल को 31 मई को नेपाल के कानून मंत्री शिवमाया तुंबाहांग्फे ने पेश किया था। बिल को पास होने के लिए संसद में सरकार को दो तिहाई समर्थन चाहिए। सरकार के पास अभी 10 वोट कम हैं।

इससे पहले, 27 मई को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली संविधान संशोधन का बिल पेश नहीं कर पाए थे। मधेसी पार्टियों ने बिल पर असहमति जताई थी। इसके बाद ओली ने इस मुद्दे को राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए पेश किया था। इसके चलते उन्हें विपक्षी पार्टियों का समर्थन भी मिला है। इस बार इस बिल के पास हो जाने के पूरी संभावना है।

नेपाल ने 18 मई को नया नक्शा जारी किया था

भारत ने लिपुलेख से धारचूला तक सड़क बनाई है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 8 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसका उद्घाटन किया था। इसके बाद ही नेपाल की सरकार ने विरोध जताते हुए 18 मई को नया मानचित्र जारी किया था। इसमें भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र में बताया।

भारत ने नेपाल के सभी दावों को खारिज करते हुए कहा था कि नेपाल का नया नक्शा ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित नहीं है। भारत के सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने कहा था कि नेपाल ने ऐसा किसी और (चीन) के कहने पर किया। भारत और नेपाल 1800 किलोमीटर का बॉर्डर शेयर करते हैं।

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