कोरोना संक्रमित मामलों के आधार पर नैनीताल रेड और ऊधमसिंह नगर ग्रीन जोन घोषित, शेष 11 जिले पूर्व की भांति ऑरेंज जोन में

देहरादून : उत्तराखंड सरकार ने कोरोना संक्रमित मामलों के आधार पर नैनीताल जिले को रेड और ऊधमसिंह नगर जिले को ग्रीन जोन घोषित कर दिया है। शेष 11 जिलों को पूर्व की भांति ऑरेंज जोन में ही रखा है। रविवार को मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। प्रदेश में बीते एक सप्ताह में कोरोना संक्रमित मरीजों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। इसमें नैनीताल जिले में सबसे अधिक संक्रमित मरीज मिले हैं। नैनीताल में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 260 पहुंच गई है। मात्र 23 मरीज इलाज के बाद घर भेजे गए हैं। जिले में सक्रिय कोरोना मामलों की संख्या 236 है। जोन के लिए तय छह मानकों में खरा न उतरने पर सरकार ने नैनीताल को रेड जोन घोषित किया है। वहीं, ऊधमसिंह नगर जिला ग्रीन जोन में लाया गया है। इस जिले में संक्रमित मरीजों की संख्या 72 हो गई है। इसमें 27 मरीज ठीक हो चुके हैं। सक्रिय कोरोना मामले 45 हैं। देहरादून, हरिद्वार समेत नौ पर्वतीय जिलों को पहले की तरह ऑरेंज जोन में ही रखा है।

ये हैं प्रदेश में जोन

रेड जोन- नैनीताल
ग्रीन जोन- ऊधमसिंह नगर
ऑरेंज जोन- देहरादून, हरिद्वार, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी

रविवार को प्रदेश में आए 158 संक्रमित

बता दें कि उत्तराखंड में रविवार को 158 मरीजों में कोरोना की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही अब प्रदेश में सक्रमित मरीजों का आंकड़ा 907 पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, आज देहरादून में 49, हरिद्वार में 17, नैनीताल में 31, टिहरी में तीन, अल्मोड़ा में 18, चंपावत में चार, पौड़ी में छह, ऊधमसिंह नगर में 20, चमोली में दो, उत्तरकाशी में सात और रुद्रप्रयाग में एक संक्रमित केस मिला है। अपर सचिव युगल किशोर पंत ने बताया कि 102 मरीज ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं। चार सरकारी लैब में अभी 6133 सैंपलों की जांच चल रही है। इनकी रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।

देवीधुरा के प्रधान सहित 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

चंपावत में प्रवासी नागरिकों को 28 मई को देवीधुरा डिग्री कॉलेज में बनाए क्वारंटीन सेंटर ले जा रही बस को रोकने और पुलिस पर पथराव मामले में ग्राम प्रधान सहित कुल 25 ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है। इन नामजद आरोपियों में पांच महिलाएं भी शामिल हैं। पुणे के 26 प्रवासियों को 28 मई को लोहाघाट से देवीधुरा के राजकीय डिग्री कॉलेज में क्वारंटीन करने ले जाया जा रहा था तभी ग्रामीणों ने बस का रास्ता रोक दिया। क्वारंटीन सेंटर ले जाने का विरोध करते हुए ग्रामीणों ने करीब छह घंटे तक जाम लगाए रखा। जाम खुलवाने पहुंची पुलिस के कुछ कर्मियों पर पथराव भी किया। पथराव में तीन पुलिस कर्मी मामूली रूप से चोटिल हुए थे। पाटी के थानाध्यक्ष नारायण सिंह ने प्रारंभिक जांच में पाया कि देवीधुरा के प्रधान ईश्वर सिंह बिष्ट, नवीन राणा, प्रकाश महर, चेतन चमियाल, गोकुल कोहली और मदन राणा के नेतृत्व में जाम लगाकर प्रवासियों को क्वारंटीन होने से रोका जा रहा था। एसओ ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 149, 188, 186, 269, 270, 332, 353, 341 व आपदा प्रबंधन की धारा 51 ख के तहत 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

इन 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

देवीधुरा के ग्राम प्रधान ईश्वर सिंह बिष्ट, नवीन राणा, प्रकाश महर, चेतन चमियाल, गोकुल कोहली, मदन राणा, बालम बिष्ट, संजय राणा, गणेश बिष्ट, गोपाल राम, गणेश राणा, सुरेश राणा, मनोज कुमार, पंकज जोशी, मनोज कठायत, सौरभ सिंह, हरीश सिंह, प्रकाश सिंह, गोविंद सिंह, विनोद सिंह, भगवती राणा, कमला देवी, राधा राणा, लक्ष्मी देवी व मंजू देवी।

पुलिस और मेडिकल अफसर के बीच झड़प

रुड़की में चेकिंग के दौरान कार रोकने पर पुलिस और मेडिकल अफसर में तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस अधिकारियों और मेडिकल अफसर में काफी देर तक गहमागहमी हो रही। पुलिस ने कार सड़क पर नहीं रोकने की बजाए पेट्रोल पंप पर लगाने पर नाराजगी जताते हुए मेडिकल अफसर को जमकर फटकार लगाई और बाद में चेतावनी देकर छोड़ दिया। शाम सात बजे के बाद लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है। शनिवार शाम भी कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस चंद्रशेखर चौक पर वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इस बीच बोट क्लब की ओर से एक कार आती दिखी तो पुलिसकर्मियों ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन कार चालक ने तेजी से कार पेट्रोल पंप पर लगा ली। पुलिस कार के पास पहुंची और कार न रोकने के बारे में पूछा तो चालक नीचे उतरा और खुद को मेडिकल अफसर बताते हुए ड्यूटी से लौटने की बात कही। पुलिस ने हाथ देने के बाद भी कार सड़क किनारे न रोकने का कारण पूछा तो वह और भड़क गए। इसे लेकर पुलिस और मेडिकल अफसर की तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस के मांगने पर मेडिकल अफसर ने आई कार्ड दिखाया। इसके बाद उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि कार पर न कोई अनुमति चस्पा थी, न ही मेडिकल संबंधी कुछ लिखा था। इसके चलते कार को रोका गया था। बाद में आई कार्ड देखने के बाद उन्हें जाने दिया गया।

Leave A Reply

Your email address will not be published.