महाशिवरात्रिः Koo App पर महादेव की भक्ति में डूबे यूजर्स, दिग्गजों ने दी शुभकामनाएं और ट्रेंडिंग बना #mahashivratri2022

उत्तराखंड, 1 मार्च 2022: यों तो देश के पहले बहुभाषी माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू ऐप पर मनोरंजन, खेल, राजनीति, कला, संस्कृति आदि विषयों पर यूजर्स और दिग्गज हस्तियां नियमित रूप से विचार-विमर्श और अभिव्यक्ति के जरिये एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। लेकिन इस देसी सोशल मीडिया मंच पर धर्म और अध्यात्म के फॉलोअर्स की संख्या भी काफी ज्यादा है। कू ऐप पर देश के प्रमुख धर्मस्थल और आध्यात्मिक गुरुओं की मौजूदगी है, जिनमें बद्रीनाथ धाम, सोमनाथ मंदिर, माता वैष्णोंदेवी मंदिर, सिद्धांगना माता, रामचंद्रपुर मठ, इस्कॉन मंदिर समेत सद्गुरु, सतपाल जी महाराज, सद्गुरु श्री रितेश्वर जी, अवधेशानंद जी समेत कई शामिल हैं। और जब मौका महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख पर्व का हो, तो इस मंच पर धार्मिक पोस्टों की संख्या बढ़ने के साथ ही ट्रेडिंग हैशटैग में महादेव और जबर्दस्त एंगेजमेंट दिखना लाजमी है।

महाशिवरात्रि के मौके पर सोशल मीडिया पर भक्ति भाव में डूबने वाले यूजर्स की तादाद बढ़ना भी स्वाभाविक नजर आता है। इसके चलते मंगलवार, 1 मार्च 2022 को महाशिवरात्रि के मौके महादेव के भक्तों को श्रद्धा और भक्ति का भरपूर रस देने के लिए सोशल मीडिया पर देश के प्रमुख मंदिरों और संगठनों द्वारा लाइव प्रसारण भी किया जा रहा है। देसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Koo App पर महाशिवरात्रि के मौके पर सद्गुरु समेत बद्रीनाथ, सोमनाथ मंदिर, ब्रह्माकुमारीज आदि भी महाशिवरात्रि का आयोजन लाइव कर रहे हैं और देश की दिग्गज हस्तियों द्वारा इस पर्व पर शुभकामनाएं दी गई हैं। इसके अलावा इस मंच पर #mahashivratri, #mahashivratri2022, #shivratri, #happymahashivaratri जैसे हैशटैग भी ट्रेंडिंग में छाए रहे।

सुधांशु जी महाराज ने महाशिवरात्रि की महिमा बताते हुए कू ऐप पर पोस्ट किया, “#Mahashivratri भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का एक सुंदर अवसर है। यह उनकी तरह का आशीर्वाद लेने का अवसर है; आनंद का दिन,
आनंद, और भक्तों के लिए ध्यान।
यह आपकी आंतरिक चेतना को ’शिव तत्व’ को स्पर्श करने के लिए प्रयास करने का भी दिन है जो शिव और शक्ति के रूप में सभी के भीतर मौजूद है।
#RudraAbhishek #omnamahshivay #mahashivratri2022🙏 #hariom”

Koo App

#Mahashivratri भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का एक सुंदर अवसर है। यह उनकी तरह का आशीर्वाद लेने का अवसर है; आनंद का दिन, आनंद, और भक्तों के लिए ध्यान। यह आपकी आंतरिक चेतना को ’शिव तत्व’ को स्पर्श करने के लिए प्रयास करने का भी दिन है जो शिव और शक्ति के रूप में सभी के भीतर मौजूद है। #RudraAbhishek #omnamahshivay #mahashivratri2022🙏 #hariom

Sudhanshu Ji Maharaj (@SudhanshuJiMaharaj) 1 Mar 2022

आध्यात्मिक गुरु स्वामी अवधेशानंद जी ने अपनी कू पोस्ट में लिखा, “हमारी आंतरिक दुर्बलताएँ व अहंकार ही जीवन का विष और आत्मिक उन्नति की सबसे बड़ी बाधा है ! भूतभावन मृत्युंजय महादेव की उपासना द्वारा आत्म ज्ञान रूपी अमृतत्व की निष्पत्ति सहज संभव है ! महादेव आपकी लौकिक -पारलौकिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करें। #महाशिवरात्रि #मृत्युंजय #mahashivratri #KooForIndia #कू ”

Koo App

हमारी आंतरिक दुर्बलताएँ व अहंकार ही जीवन का विष और आत्मिक उन्नति की सबसे बड़ी बाधा है ! भूतभावन मृत्युंजय महादेव की उपासना द्वारा आत्म ज्ञान रूपी अमृतत्व की निष्पत्ति सहज संभव है ! महादेव आपकी लौकिक -पारलौकिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करें। #महाशिवरात्रि #मृत्युंजय #mahashivratri #KooForIndia #कू

Swami Avdheshanand Giri (@avdheshanandg) 1 Mar 2022

आध्यात्मिक गुरु गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कू ऐप पर लिखा, “शिव सौंदर्य हैं, फिर भी वे अदृश्य हैं।
शिव परोपकारी हैं, फिर भी वे भयंकर हैं।
शिव सत्य है, और सब कुछ उसी में निहित है।
शिव सत्यम (सत्य), शिवम (परोपकार), सुंदरम (सौंदर्य) हैं।”

उत्तराखंड टूरिज्म ने अपने कू हैंडल से महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए पहाड़ी प्रदेश में मौजूद महादेव के प्रमुख मंदिरों को दिखाती एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। इस पावन अवसर पर आप ‘देवभूमि’ में भगवान शिव को समर्पित विभिन्न मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं। उत्तराखंड में पंच केदार की बहुत मान्यता है, जिनमें श्री केदारनाथ धाम, मध्यमहेश्वर मंदिर, तुंगनाथ मंदिर, रुद्रनाथ मंदिर तथा कल्पेश्वर मंदिर हैं। इन मंदिरों में देवों के देव, महादेव के विविध स्वरूपों की आराधना होती है। #SHIVRATRI #UTTARAKHAND #shivmandir”

Koo App

आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। इस पावन अवसर पर आप ‘देवभूमि’ में भगवान शिव को समर्पित विभिन्न मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं। उत्तराखंड में पंच केदार की बहुत मान्यता है, जिनमें श्री केदारनाथ धाम, मध्यमहेश्वर मंदिर, तुंगनाथ मंदिर, रुद्रनाथ मंदिर तथा कल्पेश्वर मंदिर हैं। इन मंदिरों में देवों के देव, महादेव के विविध स्वरूपों की आराधना होती है। #SHIVRATRI #UTTARAKHAND #shivmandir

Uttarakhand Tourism (@uttarakhand_tourismofficial) 1 Mar 2022

अगर बात सोशल मीडिया मंच कू ऐप पर धर्म-अध्यात्म से जुड़े अकाउंट्स की तो सद्गुरु (@sadhguruhindi) के पास धर्म-अध्यात्म श्रेणी में सर्वाधिक फॉलोअर्स हैं। फिलहाल इनकी संख्या 16 लाख से ज्यादा है। जबकि इसके बाद सद्गुरु का ही दूसरा हैंडल ( @SadhguruJV) है, जिस पर करीब ढाई लाख फॉलोअर्स मौजूद हैं। फिर स्वामी अवधेश आनंद जी (@avdheshanandg) के फॉलोअर्स की संख्या भी 2.39 लाख से ज्यादा, सद्गुरु कन्नड़ के 1.93 लाख, सद्गुरु तेलुगु के 1.92 लाख, ब्रह्माकुमारीज के 97 हजार और स्वामी रामपाल जी महाराज के 74 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। इसके अलावा सुधांशु जी महाराज, सोमनाथ मंदिर, श्री महाकाल उज्जैन, संत इंद्रदेव जी महाराज, सद्गुरु श्री रितेश्वर जी, बद्रीनाथ धाम, नीलकांत मंदिर, वैष्णोंदेवी मंदिर के फॉलोअर्स की तादाद भी तेजी से बढ़ती जा रही है।

कू के बारे में

Koo App की लॉन्चिंग मार्च 2020 में भारतीय भाषाओं के एक बहुभाषी, माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के रूप में की गई थी, ताकि भारतीयों को अपनी मातृभाषा में अभिव्यक्ति करने में सक्षम किया जा सके। भारतीय भाषाओं में अभिव्यक्ति के लिए एक अनोखे मंच के रूप में Koo App भारतीयों को हिंदी, मराठी, गुजराती, पंजाबी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, असमिया, बंगाली और अंग्रेजी समेत 10 भाषाओं में खुद को ऑनलाइन मुखर बनाने में सक्षम बनाता है। भारत में, जहां 10% से अधिक लोग अंग्रेजी में बातचीत नहीं करते हैं, Koo App भारतीयों को अपनी पसंद की भाषा में विचारों को साझा करने और स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्ति के लिए सशक्त बनाकर उनकी आवाज को लोकतांत्रिक बनाता है। मंच की एक अद्भुत विशेषता अनुवाद की है जो मूल टेक्स्ट से जुड़े संदर्भ और भाव को बनाए रखते हुए यूजर्स को रीयल टाइम में कई भाषाओं में अनुवाद कर अपना संदेश भेजने में सक्षम बनाती है, जो यूजर्स की पहुंच को बढ़ाता है और प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रियता तेज़ करता है। प्लेटफॉर्म ने हाल ही में 2 करोड़ डाउनलोड का मील का पत्थर छुआ है और इस साल 10 करोड़ डाउनलोड तक पहुंचने की ओर अग्रसर है। राजनीति, खेल, मीडिया, मनोरंजन, आध्यात्मिकता, कला और संस्कृति के मशहूर लोग द्वारा अपनी मूल भाषा में दर्शकों से जुड़ने के लिए सक्रिय रूप से मंच का लाभ उठाते हैं।

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