गीत : चाँद आवारा हो गया है…

चाँद आवारा हो गया है
रात सकते में है इससे।
कभी देर से आता
कभी जल्दी चला जाता
घटते-बढ़ते रहते उसके तेवर
अमावस की रात ना जाने, कहाँ खो गया है
चाँद आवारा हो गया है।
पूर्णिमा को सजता-सँवरता
निशा की कालिमा हरता
घटाओं संग करें अठखेलियां
कभी छुपता पीछे, कभी प्रकट हो गया है
चाँद आवारा हो गया है।
ग्रहण से जो बेखबर
कब खत्म हो जाये असर
सुधर पायें पर ना सुधरें, ये इसको क्या हो गया है
चाँद आवारा हो गया है।

– व्यग्र पाण्डे
कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी,
स.माधोपुर (राज.) 322201
मोबा: नं. – 9549165579
ई-मेल पता : vishwambharvyagra@gmail.com

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