लॉकडाउन ने साबित कर दिया है कि मनुष्य पालन करे तो प्रकृति आज भी सुंदर और जीवनदाई है!

डिजिटल डेस्क : प्रकृति मनुष्य के लिए सदा से ही फलदाई रही है, किंतु अज्ञानी मनुष्य ने इसमें असंतुलन पैदा कर अपने ही विनाश की तैयारी कर ली है! अब से लगभग 50 वर्ष पूर्व पूरे भारतवर्ष में वृक्षों की कमी नहीं थी और, नदियां बिल्कुल साफ स्वच्छ हुआ करती थी , किंतु लोभी मनुष्य ने धीरे धीरे अपने स्वयं के लाभ के कारण इसका विनाश करना चालू कर दिया और प्रकृति में असंतुलन पैदा हो गया, किंतु आज लॉक -डाउन ने यह दिखा है अगर मनुष्य प्रकृति नियमों का ठीक से पालन करे तो प्रकृति आज भी पहले की तरह सुंदर और फलदाई है! आज आप देख रहे हैं कि बहुत सी ऐसी जगह है जहां से हिमालय पर्वत के पहाड़ तक दिखाई दे रहे हैं! इससे यह बात सिद्ध होती है कि वातावरण साफ हुआ है !इतना ही नहीं वहां की नदियां जो गंदे नाले का रूप ले चुकी थी वह आज लॉक- डाउन के कारण स्वच्छ और साफ हो चुकी हैं!विभिन्न प्रकार के जीव जंतु पशु पक्षी दोबारा की तरह दिखने लगे हैं! यह सब बात यह दर्शाती है कि मनुष्य अगर प्राकृतिक को समझे और जितनी जरूरत हो उतना ही प्रकृति से लें तभी प्रकृति जीवन दाई सिद्ध हो सकती है, अन्यथा प्रकृति का दुरुपयोग स्वयं के विनाश के सिवा कुछ नहीं ! आपने देखा ही होगा कि किस प्रकार मनुष्य ने अपने निजी लाभ के लिए पेड़ों का विनाश करना चालू कर दिया, नदियों में उद्योगों का गंदा केमिकल पानी डाला जाने लगा! परिणाम स्वरूप नदी के निर्मल जीव जंतु मरने लगे, वह पेड़ जो ऑक्सीजन देते थे ना होने के कारण ऑक्सीजन की मात्रा वायुमंडल में कम हो गई,! व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता इतनी कम हो गई कि कोरोना जैसे घातक वायरस के चपेट में आते ही व्यक्ति संक्रमित होने लगे हैं! दरसअल मनुष्य ने कभी इस विषय का आकलन किया ही नहीं की प्रकृति को नुकसान पहुंचाने का दुष्परिणाम स्वयं को ही भोगना होगा! और आज स्थिति आपके सामने हैं! बिना मौसम के ओले पड़ रहे हैं सर्दी के महीने में गर्मी और गर्मी के महीने में सर्दी, यह सब क्या हो रहा है! कहते हैं प्रकृति विनाश करने से पहले हल्का सा इशारा देती है! कि अब भी समय है सुधर जा ए मानव, अन्यथा तू मुझे नष्ट कर स्वयं ही नष्ट हो जाएगा! किंतु जहां आज लॉक -डाउन के कारण मनुष्य को यह बात समझ में आ रही है कि जो शहर प्रदूषण के भंडार से भरे हुए थे जहां सांस लेने में दम घुटता था! आज वहां सांस लेने में आनंद की प्राप्ति हो रही है! जहां प्रदूषण के कारण आंखों में जलन होती थी वहां आज जलन नहीं हो रही! व्यक्ति का स्वास्थ्य जैसे फेफड़ों की गंभीर बीमारी,और अस्थमा के रोगियों को पहले से राहत मिली है! आज के युग में अगर मनुष्य को समझने योग्य कोई बात है तो वह है प्रकृति का सम्मान करें! इसका विनाश ना करें ,इसकी रक्षा करें! जिस प्रकार मनुष्य भौतिक सुख सुविधाओं के लिए बड़े बड़े मॉल रोड बिल्डिंग सड़कें इत्यादि बनाने मैं वहां लगे पेड़ों को काट देता है! वहीं से प्रकृति में असंतुलन पैदा हो जाता है! हम लोगों को अपनी भौतिक सुख सुविधाएं कम करनी होगी , तत्पश्चात पहले की तरह प्रकृति सुंदर हो पाएगी!बड़े-बड़े डॉक्टरों और विशेषज्ञों की राय है कि इस कोरोना काल में जिस व्यक्ति का इम्युनिटी सिस्टम सही है वही व्यक्ति कोरोना वायरस से बच सकता है! यदि हमें साफ जल स्वच्छ वायु प्राप्त होगा तो हमारा इम्यूनिटी सिस्टम स्वयं ही ठीक होने लगेगा! और हम कम बीमार पड़ेंगे, आइए हम प्रण लेते हैं कि हम अपने आसपास के वृक्षों को नहीं काटेंगे, नदियों को नालों का रूप नहीं लेने देंगे, जीव जंतु पशु पक्षियों की रक्षा करेंगे, और अपनी जरूरतों को कम करेंगे जिसके कारण प्रकृति का विनाश ना हो सके, और हर एक व्यक्ति एक पौधे का वृक्षारोपण करेगा,यदि हम सब मिलकर इन नियमों का पालन करते हैं तो निश्चित तौर पर, हमें गंभीर रोगों से छुटकारा मिलेगा! और कोरोना वायरस जैसी घातक बीमारी धीरे धीरे कर भारत ही नहीं पूरे विश्व से समाप्त हो जाएगी! इसी संकल्प के साथ सरकार से भी आग्रह है कि इस विषय पर संज्ञान लेते हुए कठोर से कठोर कदम उठाए और प्रकृति को बचाने हेतु कठोर कानून बनाएं ,जिससे कि मनुष्य, एक सुखी जीवन निर्वाह कर सकें! जय हिंद वंदे मातरम्, प्रकृति बचाओ पृथ्वी बचाओ मानव जीवन बचाओ

लेखक व सामाजिक- चिंतक अमित राजपूत
ओड राजपूत विकास समिति महानगर युवा अध्यक्ष
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश

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