स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं अमृत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में कविता
स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं अमृत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में कविता
स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं अमृत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में कविता

स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं अमृत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में कविता

स्वतंत्रता दिवस की अमृत जयंती
मना रहे हैं हम नागरिक सारे
75 वर्ष हो गए आज़ादी को
फिर भी प्रश्न शेष रह गए थे अधूरे

हिम्मत जज़बा है काम करने का तो
मिल जाते हैं प्रश्नों के उत्तर पूरे
हर कदम पर विरोध रहकर भी
सफलता के पथ करने होते हैं पूरे

हर भारतीय को मिलेंगे उत्तर तब
जब मिशन आत्मनिर्भरता के स्वप्न होंगे पूरे
फिर उगलेगी हमारे देश की धरती
सोना चांदी मोती हीरे, सोना चांदी मोती हीरे

संकल्प हम करें तो करें ऐसे
संस्कार और संस्कृति की शान मिले ऐसे
हिंदू मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले ऐसे
हम मिलजुल कर रहे ऐसे

माहौल हम पैदा करें ऐसे
मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में राम मिले जैसे
पक्ष विपक्ष मिलकर एक हो ऐसे
दशकों से बिछड़े भाई मिलें हो जैसे

स्वतंत्रता दिवस की सभी को शुभकामनाएं!

*लेखक-कर विशेषज्ञ, साहित्यकार, कानूनी लेखक, चिंतक, कवि,
एडवोकेट किशन सन्मुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र*

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