आजादी का जश्न : अमृत-महोत्सव
आजादी का जश्न : अमृत-महोत्सव
आजादी का जश्न : अमृत-महोत्सव

आजादी का जश्न : अमृत-महोत्सव

डिजिटल डेस्क : आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर पूरे देश में ‘अमृत-महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का जगह-जगह संचालन हो रहा है। इस महोत्सव का असल उद्देश्य परतंत्र से स्वतंत्र लोकतंत्र की यात्रा का परिचय कराना है। ताकि जन-जन तक को आजादी की कहानी की जानकारी मिल सके। आने वाली पीढ़ी उन तमाम शहीदों का स्मरण कर सके।

बड़े ही संघर्ष के बाद एवं बलिदानों के बाद देश आजाद हुआ। अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति मिली देश ने जश्न मनाया। जो कि हर साल 15 अगस्त को ही मनाया जाता है। संविधान के मुताबिक लोकतंत्र में सबको अभिव्यक्ति की आजादी है। इतने सालों के भीतर देश विभिन्न परिस्थितियों के दौर से गुजरता आ रहा है। फिर भी भारत ने विश्व के उन शीर्ष देशों की श्रेणी में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी जो विकास एवं अर्थव्यवस्था में सबसे आगे हैं। भारत के अन्य तमाम देशों के साथ जो रिश्ते कायम हैं वे एक मिसाल के रूप में हैं।

केवल चीन और पाकिस्तान ही ऐसे देश हैं जो हरदम कुछ न कुछ कूटनीति चलकर द्वेष बनाए रखते हैं। भारत एक शांतिप्रिय देश है। जिसकी नीति न कभी किसी की सीमा को हथियाने की रही है और ना ही किसी देश के अंतरंग मामलों में बेवजह हस्तक्षेप करने की। भारत की विदेश नीति बहुत ही साफ और सुदृढ़ है।

यही कारण है कि भारत के साथ हर देश अपने गूढ़ संबंध बनाए रखना चाहता है, दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहता है। ऐसा नहीं कि यहां गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं नहीं हैं। सब मुद्दे हैं जो कि मुंह बाए खड़े हैं। विशाल आबादी वाले देश में हर किसी की समस्या को हल कर पाना बहुत मुश्किल है। जब तक जनसंख्या पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं किया जाता तब तक इन समस्याओं से आजादी नहीं मिलेगी। असली आजादी तभी मानी जाएगी जब देश में हर तरफ खुशहाली होगी।

– ओम प्रकाश उनियाल

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