सिर्फ एक दिन हिंदी दिवस क्यों?
HINDI DIVAS

डिजिटल डेस्क : यदि यों कहें कि हिंदी दिवस मनाना बंद कर दिया जाए तो सम्भवतः असंगत नहीं होगा क्योंकि हिंदी अब ऐसे मुकाम पर है जहाँ से हिंदी एक दिवस की मोहताज नहीं है बल्कि हर दिन हिंदी से है और हर दिन हिंदी का है।अब तो चर्चा इस बात की होनी चाहिए कि आखिर हिंदी को अभी तक राष्ट्रभाषा का दर्जा क्यों नहीं दिया जबकि इस समय हिंदी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर चुकी है पर हमारे यहाँ हम मात्र दिवस मना कर ही,भाषणबाजी करके ही इतिश्री कर देते हैं जबकि सोचना हमें यह चाहिए कि हमारे कारण हिंदी की पहचान नहीं है बल्कि सच यह है कि हिंदी के कारण हमारी पहचान है।हिंदी के कारण हम डटे हुए हैं। हिंदी के कारण हम आगे बढ़ रहे हैं। हिंदी के कारण हमारी संस्कृति और सभ्यता अभी तक सुरक्षित है। अब तो हमें यह सोचना चाहिए कि कैसे हिंदी अंतर्राष्ट्रीय भाषा का स्थान ले और अंग्रेजी के स्थान पर आसीन हों क्योंकि विश्व के सबसे ज्यादा देशों में हिंदी बोली और समझी जाती है? पढ़ी और पढ़ाई जाती है।हिंदी का अपना एक भाषा विज्ञान है जिस पर आज के दौर में ऊँगली उठाना बेहद मुश्किल है।

हिंदी का अपना शब्द भंडार इतना विस्तृत हो गया है कि शनै-शनै हिंदी खुद को इतनी सरलता की ओर ले जा रही है कि अंतर्राष्ट्रीय भाषा बनने के बहुत नजदीक हैं।लेकिन दुर्भाग्य यह है कि हम हिंदी वाले जिनकी माँ हिंदी है वो विदेशी भाषा के मोह से ग्रसित होते जा रहे हैं।यहाँ यह साफ तौर पर समझ लेना चाहिए कि किसी भी भाषा का सीखना,बोलना और पढ़ना कतई बुरा नहीं है क्योंकि हमें हर तरह की भाषा,भाव,साहित्य और संस्कृति से सीखना चाहिए मगर इसका मतलब यह भी तो कदापि नहीं कि हम विदेशी भाषा के इतना मोह में हो जाएं कि अपनी माँ भाषा की ही अनदेखी कर दें और यदि हम ऐसा करते हैं तो फिर यह खुद ही खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारना कहा जाएगा।क्योंकि अगर खुद का,देश का और समाज का विकास हम चाहते हैं तो वह बिना अपनी भाषा के संभव नहीं हो सकता।

एक बात याद रखिए कि हमारा हँसना,रोना और कल्पना करना केवल अपनी भाषा में ही होता है न कि जो विदेशी भाषा में।हिंदी के बारे में एक बात कही जाती है कि हिंदी में रोजगार की सम्भावनाएं नहीं है,यह बात सिरे से गलत है क्योंकि जितनी रोजगार की सम्भावनाएं हिंदी में हैं,उतनी सम्भवतः किसी अन्य भाषा में नहीं।यहाँ तक कि जापान जैसे देश में भी हिंदी में रोजगार सबसे ज्यादा है।अब हिंदी एक ऐसी भाषा बन चुकी है कि जिसे रोका नहीं जा सकता जबकि हिंदी प्रदेशों के लोग ही इसकी राह में रोड़ा बनने की कोशिश करते हैं जबकि वो गुणगान हिंदी का करते हैं पर हिंदी के लिए काम नहीं करते। जैसे कि हरियाणा हिंदी भाषा-भाषी प्रदेश है।ज्ञात रहे कि इसकी तो नींव ही हिंदी भाषा के कारण पड़ी थी और गर्व की बात है कि  उस आंदोलन में भाग लेने वालों को हरियाणा की सरकार स्वतंत्रता आंदोलनकारी का दर्जा दे चुकी है मगर हिंदी का सम्मान करना भूल रही है।

क्योंकि प्रदेश में हिंदी को हम खुद ही खत्म करते जा रहे हैं अब देखिए ना! हिंदी का शिक्षण कार्य भी वैकल्पिक विषय के शिक्षक द्वारा करवाया जा रहा है यानि कि हम ही हिंदी की राह में रोड़ा बन रहे हैं जबकि चाहिए यह कि बेशक हम किसी भी भाषा का विकास करें पर उसके लिए हिंदी की बलि देना जरूरी तो नहीं लेकिन हरियाणा की सरकार ऐसा ही कर रही है और जहाँ से हिंदी की नींव मजबूत होती है यानि कि सरकारी स्कूलों में,यहाँ से हिंदी भाषा शिक्षक के पद थोक में कम कर दिए गए हैं जबकि हिंदी भाषा शिक्षक के पद तो प्राथमिक कक्षाओं में भी होने चाहिए ताकि हिंदी बनी रहे मगर दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा।सरकार को चाहिए कि इस ओर जरूर ध्यान दे और हिंदी का पद सभी स्कूलों में स्वतंत्र रूप से दे ताकि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें। आइए! हम सब हिंदी को मान देते हुए हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करें और हर दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाएं और निरंतर बोलते रहें जय हिंदी,जय भारत क्योंकि जननी जन्मभूमि तो स्वर्ग से बढ़कर हुआ करती है।

- कृष्ण कुमार निर्माण

9034875740

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