परेशान कर रहा हैं आपको गर्दन का दर्द, ये 8 योगासन दिलाएंगे इससे छुटकारा

परेशान कर रहा हैं आपको गर्दन का दर्द, ये 8 योगासन दिलाएंगे इससे छुटकारा

कुर्मासन :
टर्टल पोज करने के लिए सबसे पहले अपने पेट के बल योगा मैट पर लेट जाएं। अपने हाथों को अपने कूल्हों के नीचे रखें और इन्हें जमीन में मजबूती से लगाएं। अपने सिर को जमीन से ऊपर उठाएं, इसे अपनी कोहनी पर टिकाएं। इस मुद्रा को पूरा करने के लिए अपनी ठुड्डी को अपनी छाती से लगाएं। अपनी गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को आराम देने पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस स्थिति में 20 सेकंड के लिए रहें।


मार्गरी आसन :
इस योग मुद्रा को करने के लिए कलाई कंधे के नीचे और घुटने कूल्हों के नीचे होते हैं। सभी चौकों पर समान रूप से संतुलन बनाने के साथ ऊपर देखते हुए, श्वास लें और पेट को फर्श की ओर आने दें। सांस छोड़ते हुए ठुड्डी को छाती से स्पर्श करें और नाभि को रीढ़ की ओर खींचे। इस आसन को दोहराएं। यह आसन गर्दन और कंधों को मजबूत करता है।


कोबरा मुद्रा :
इस मुद्रा में आने के लिए सबसे पहले फर्श पर मुंह के बल लेट जाएं। अपने हाथों को सीधे अपने कंधों के नीचे रखें, हथेलियां नीचे की ओर हों और उंगलियां आगे की ओर हों। अपने शरीर को तब तक ऊपर की ओर धकेलें जब तक कि ये सिर से पैर तक एक सीधी रेखा में न आ जाए। अगरआप सक्षम हैं तो 30 सेकंड से एक मिनट या इससे अधिक समय तक रुकें।


बालासन :
घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं और शरीर का सारा भार एडिय़ों पर डालें। गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें। आपका सीना जांघों से छूना चाहिए और अपने माथे से फर्श को छूने की कोशिश करें। कुछ सेकंड इस अवस्था में रहें और वापस उसी अवस्था में आ जाएं। इस आसन से केवल गर्दन और पीठ के दर्द से ही आराम नहीं मिलता बल्कि मन भी शांत होता है। यह आसन कूल्हों, जांघों और पिंडलियों को लचीला बनाकर ताजगी का अहसास कराता है। यह गर्दन, पीठ और रीढ़ को आराम देता है और कंधों पर तनाव कम करता है।


वीरभद्रासन :
आप वीरभद्रासन का सहारा ले सकते हैं। इस योग को करने से भी कंधे और गर्दन को दूर करने में मदद मिलती है। वीरभद्रासन तीन प्रकार के होते हैं। इनमें पहली मुद्रा को करने से कंधे और गर्दन के दर्द से छुटकारा मिलता है। इसके लिए सबसे पहले ताड़ासन मुद्रा में आ जाएं। अब अपने दोनों हाथों को धड़ की सीध में ऊपर उठाएं। इस दौरान अपना ध्यान हाथों पर रखें। इसके बाद अपने दाहिने पैर को आगे करें। इस अवस्था में कुछ देर तक रहें। इसके बाद पुन: पहली अवस्था में आ जाएं।


नटराज आसन :
अपनी पीठ को सीधे रखते हुए ज़मीन पर लेट जाएँ। धीरे से अपने सीधे पैर को उठा कर बाएँ पैर के उपर ले आएँ। बायां पैर सीधा ही रखें। ध्यान रहे कि दाहिना पैर ज़मीन पर एक सीधा कोण बनाए। अपने दोनों हाथों को शरीर के दाहिने और बाएँ तरफ फैला कर रखें। चेहरे को दाहिनी तरफ मोड़ लें। कुछ गहरी लंबी श्वास लें और छोड़ें और इसी मुद्रा में तीस सेकंड्स तक स्थिर रहें।बाएँ पैर से इसी आसन की पुनरावृति करें। यह आपकी मांसपेशियों को तो लचीला बनाती ही है साथ ही आपको पूर्णता और आनंद का अनुभव कराती है। यह शिव के नृत्य की मुद्रा है। शिव तत्व को अपने भीतर व चारों ओर महसूस करें।


सलंब भुजंगासन :
अपने कंधों के नीचे अपनी कोहनी के साथ अपने पेट के बल लेट जाएं, अपनी हथेलियों और फोरआर्म्स को दबाएं। अपने ऊपरी धड़ और सिर को ऊपर उठाते हुए अपनी पीठ के निचले हिस्से, नितंबों और जांघों को सहारा देने के लिए कस लें। अपनी आंखों को सीधे आगे रखें और सुनिश्चित करें कि आप अपनी रीढ़ को लंबा कर रहे हैं। इस मुद्रा में 2 मिनट तक रहें।


बीतिलीआसन :
अपनी पिंडलियों को ज़मीन पर रखें और बाकी शरीर को टेबल टॉप मुद्रा में रखें, यानि कि अपनी जांघों, धड़ और हाथों की सहायता से एक मेज़ का रूप धारण करें। अपने घुटने और कूल्हों को एक ही लाइन में रखें। अपनी कमर, कोहनियों तथा कंधों को भी एक लाइन में ज़मीन से सटा कर रखें। आपका धड़ ज़मीन के समानांतर हो। इस मुद्रा में रहते हुए सांस भरें और अपने पेट को ज़मीन की तरफ अंदर खींचें। अब अपने सिर को उपर की तरफ उठाएँ। इसी मुद्रा में थोड़ी देर तक रहें और फिर मार्जरिआसन में आ जाएँ।

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