जीवन अमूल्य निधि है

मनुष्य के लिए जीवन अमूल्य निधि है, मनुष्य के सुख और दुख से ही जीवन का ताना-बाना जुड़ा हुआ है। अर्थात संघर्ष ही जीवन का प्रमुख आधार है, जिसके माध्यम से ही मनुष्य स्वयं को प्रगति के पथ पर अग्रसर कर सकता है। वस्तुतः जीवन सदैव एक समान नहीं रहता, क्योंकि जीवन परिवर्तनशील है। इसके लिए मनुष्य को निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रयासरत होना चाहिए। इतिहास साक्षी रहा है, जिस भी मनुष्य ने दुख और कष्टों की परवाह ना करते हुए निरंतर जीवन संघर्ष का डटकर सामना किया है। वे अपने जीवन में सफल अवश्य ही हुए हैं। आज कोविड-19 महामारी के चलते लोगों के मनों में डर, अशांति, चिंता, बेचैनी ने घर कर लिया है पिछले दो-तीन दिनों से निरंतर सोशल मीडिया अखबारों, न्यूज़ चैनल्स पर युवाओं द्वारा आत्महत्या के बारे में सुनने को मिल रहा है। मन बहुत व्यथित होता है कि इस तरह का कदम किस प्रकार कोई मनुष्य उठा सकता हैl बेरोजगारी, गरीबी, चिंता, भूख, निराशा, डर के कारण मनुष्य इतना विवश किस प्रकार हो सकता है? बार-बार इसी बात पर मेरे मन में अशांति सी है ,क्या समस्याएं इतनी बड़ी है, जो मनुष्य के जीवन से भी अधिक हैंl किस प्रकार की मानसिकता आजकल युवा वर्ग के दिमाग में पनप रही है? कोविड-19 विश्व महामारी भारत ही नहीं, अपितु विश्व का हर देश आज इससे पीड़ित हैंl इतिहास गवाह रहा है विश्व में पहली बार तो नहीं किसी महामारी ने हमारे जीवन में दस्तक दी हैl तो मात्र इस महामारी से डर करअपनी जीवन लीला समाप्त कर देना क्या उचित है, मुझे नहीं लगता हमारे जीवन से ऊपर कोई भी समस्या, परेशानी अशांति, दुख है! मात्र कुछ दिनों के लिए आपको अपनी घरों में बैठना पड़ रहा है, आप अपने काम पर नहीं जा पा रहे,धन की कमी इत्यादि क्या बहुत बड़े विषय हैं??? मुझे नहीं लगता ।कुछ तो कमी है आज की युवा पीढ़ी में उसकी मानसिकता में या उसकी परवरिश में! इसको हम मानसिक कमजोरी भी कह सकते है। अंततः जो भी है, हमें इस बारे में विचार करना चाहिए कि आखिर कमी कहां है?? हमें जो आज शिक्षा और संस्कार मिल रहे हैं मुझे लगता है, उनमें कोई ना कोई कमी है। दोस्तों यह जिंदगी इतनी सस्ती नहीं है कि निराश होकर हम मृत्यु को प्राप्त हो जाये। आज मानसिक रूप से दृढ़ होने की आवश्यकता है, ना कि निराश होकर आत्महत्या कर लेने की। क्योंकि आत्महत्या सबसे बड़ा अपराध है, कोई भी परेशानी मृत्यु से कभी हल हो ही नहीं सकती। जीवन के लिए कठिन परिश्रम ही सफल मनुष्य की पहचान है, बस नकारात्मकता को सकारात्मकता में परिवर्तित करने की जरूरत होती है। दोस्तों कृपया मजबूत रहे और अपने आसपास के प्रत्येक व्यक्ति को सकारात्मकता की ऊर्जा का बोध करवाएं। स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें।

– विभा रीन शर्मा
पीएच.डी शोध छात्रा
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय
अमृतसर, पंजाब

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