कुंभ फर्जी जांच केस : उत्तराखंड की कई प्राइवेट लैब पर ईडी का शिकंजा

देहरादून। उत्तराखंड में कोविड सैंपलिंग के काम में लगी एक दर्जन के करीब प्राइवेट लैब प्रवर्तन निदेशालय के रडार पर हैं। ईडी ने स्वास्थ्य विभाग से इन लैब की जानकारी मांगी है। जल्द इस मामले में जांच शुरू हो सकती है। विदित है कि हरिद्वार महाकुंभ के दौरान कोरोना जांच में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई थी। इस गड़बड़ी में शामिल कई लैब पर मनी लॉंडिंग का संदेह था।

इसे देखते हुए पर्वतन निदेशालय ने जांच शुरू की थी। लेकिन अब कुछ अन्य लैब भी ईडी के निशाने पर आ गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि हरिद्वार महाकुंभ के इतर राज्य में काम करने वाली एक दर्जन के करीब प्राइवेट लैब की जानकारी ईडी ने मांगी है। इनमें में से कई लैब ने कुंभ में काम किया जबकि कई ने नहीं किया है। स्वास्थ्य विभाग को भी ईडी की जांच की भनक तब लगी जब इस संदर्भ में पत्र मिला।

जिन लैब की जांच चल रही है उनमें राज्य की कुछ बड़ी निजी लैब शामिल है। राज्य में हरिद्वार महाकुंभ के अलावा भी प्राइवेट लैब कोविड जांच फर्जीवाड़े में पकड़ी गई हैं। एक लैब को तो कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने ढ़ालवाला में अपने सामने ही पकड़ा था। स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित नेगी ने भी प्राइवेट लैब की जांच के संदर्भ में ईडी के पत्र की पुष्टि की। हालांकि इस संदर्भ में ज्यादा जानकारी से उन्होंने इंकार किया।

मनी लॉंड्रिंग क्या है: मनी लॉंड्रिंग का मतलब अवैध रूप से कमाए गए धन को वैध तरीके से कमाए गए धन में बदलना है। मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से धन ऐसे कामों या निवेश में लगाया जाता है कि जाँच करने वाली एजेंसियां भी धन के मुख्य सोर्स का पता नही लगा पाती। मनी लॉन्ड्रिंग में अवैध तरीके से कमाया गया काला धन सफेद होकर असली मालिक तक पहुंच जाता है। कोरोना संक्रमण के बाद से कोविड टेस्टिंग एक बहुत बड़ा कारोबार साबित हो रहा है। ऐसे में कई निवेशक इस धंधे के जरिए अपना पैसा सफेद कर रहे हैं। देश भर में कई लैब पर ऐसा शक है और इसीलिए ईडी लैब की जांच कर रही है।

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