जानिए सुन्दरकाण्ड की वो अद्भुत बातें जो आपने शायद ही कभी सुनी होगी

डिजिटल डेस्क : रामचरित मानस सुन्दरकाण्ड का मुख्य अध्याय है, ऐसा माना जाता है कि संपूर्ण रामायण में से सुन्दरकाण्ड हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है इसलिए जो भी ग्रहीय दोष की चपेट में होते हैं उन्हें सुन्दरकाण्ड का पाठ ज़रूर करना चाहिए। सुन्दरकाण्ड का पाठ पढ़ने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।

सुन्दरकाण्ड पाठ करने की विधि ओर नियम

सुंदरकांड का नित्यप्रति पाठ करना हर प्रकार से लाभदायक होता है। इसके अनंत लाभ हैं, लेकिन यह पाठ तभी फलदायी होता है, जब निर्धारित विधि-विधानों का पालन किया जाए। सुंदरकांड का पाठ करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। पाठ स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करके करना चाहिए। सुंदरकांड का पाठ सुबह या शाम के चार बजे के बाद करें, दोपहर में 12 बजे के बाद पाठ न करें। पाठ करने से पहले चौकी पर हनुमानजी की फोटो अथवा मूर्ति रखें। घी का दीया जलाएं। भोग के लिए फल, गुड़-चना, लड्डू या कोई भी मिष्ठान अर्पित करें। पाठ के बीच में न उठें, न ही किसी से बोलें। सुंदरकांड प्रारंभ करने के पहले हनुमानजी व भगवान रामचंद्र जी का आवाहन जरूर करें। जब सुंदरकांड समाप्त हो जाए, तो भगवान को भोग लगाकर, आरती करें। तत्पश्चात उनकी विदाई भी करें।

विदाई

कथा विसर्जन होत है, सुनो वीर हनुमान,
जो जन जंह से आए हैं, ते तह करो पयान।
श्रोता सब आश्रम गए, शंभू गए कैलाश।
रामायण मम हृदय मह, सदा करहु तुम वास।
रामायण जसु पावन, गावहिं सुनहिं जे लोग।
राम भगति दृढ़ पावहिं, बिन विराग जपयोग।।

आप जब तक सुंदरकांड का पाठ करें, मांस-मदिरा का सेवन न करें। बह्मचर्य की स्थिति में रहें। लगभग सभी हिन्दू घरों में सुंदर कांड का पाठ होता है लेकिन फिर भी आप लोग सुंदरकांड के बारे ये बातें नहीं जानते होंगे। आज हम आपको बताते हैं सुन्दरकाण्ड के विषय में बहुत सी बातें।

– सुंदरकांड का नाम हनुमान जी और सीता की मुलाकात से जुड़ा हैं। रावण ने जहाँ सीता को रखा था, वो अशोक वाटिका थी जो कि बहुत सुंदर थी। इसी ख़ूबसूरत वाटिका में हनुमानजी की भेंट सीता जी से हुई थी। इसी भेंट पर सुंदर कांड का पाठ आधारित हैं।

– सुंदरकांड का सम्बन्ध हनुमान जी और उनके ओज से है। इसके पाठ से पवनपुत्र की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

– सुंदरकांड का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मनुष्य की हर मनोकामना पूरी होती हैं।

– सुंदरकांड का पाठ करने से भय से भी मुक्ति मिलती हैं।

– सुंदरकाण्ड में हनुमान का लंका प्रस्थान, लंका दहन से लंका से वापसी तक के घटनाक्रम आते हैं।

– इस पाठ को हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक लगा करकरने से अधिक फल प्राप्त होता है|

– सुन्दरकाण्ड एक ऐसा पाठ है जो की हरप्रकार की बाधा और परेशानियों को खतम कर देने में पूर्णतः समर्थ है|

– इसके से पाठ मन को शांति और सुकून मिलता है मानसिक परेशानियों और व्याधियो से ये छुटकारा दिलवाने में कारगर है|

– जिन लोगो को गृह कलेश की समस्या है इस पाठ से उनको विशेष फल मिलते है|
अगर घर का मुखिया इसका पाठ घर में रोज करता है तो घर का वातावरण अच्छा रहता है|

– घर में या अपने आप में कोई भी नकारात्मक शक्ति को दूर करने का ये अचूक उपाय है|

– अगर आप सुनसान जगह पर रहते है और किसी अनहोनी का डर लगा रहता हो तो उसस्थान या घर पर इसका रोज पाठ करने से हर प्रकार की बाधा से मुक्ति मिलती है और आत्मबल बढ़ता है|

– जिनको बुरे सपने आते हो रात को अनावश्यक डर लगता हो इसके पाठ निश्चित से आराम मिलेगा|

– जो लोग क़र्ज़ से परेशान है उनको ये पाठ शांति भी देता है और क़र्ज़ मुक्ति में सहायक भी होता है|

– भूत प्रेत की व्याधि भी इस पाठ को करने से स्वतः ही दूर हो जाती है|

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