हास्य व्यंग्य : “आज खाने में क्या बनाऊँ”

आज खाने में क्या बनाऊं, इस वाक्य की गूंज हर घर में प्रतिदिन सुनाई देती है। केवल कुंवारों को छोड़ कर, हर व्यक्ति को पूरी जिंदगी इस सनातन वाक्य से प्रतिदिन दो चार होना पड़ता है। और उसके बाद पति का एक ही घिसा पीटा, बिना पत्नी की ओर देखे जवाब होता है, कुछ भी बना लो। ये बोल कर पति फिर से अखबार में या टी वी में मस्त हो जाता है।उसके बाद बीवियों की प्रतिक्रिया स्वरूप जो जुबानी बम फूटते हैं, उनहें केवल पति जैसा ढीठ प्राणी ही चुप रह कर झेल सकता है।अगर कहीं गलती से पति रूपी निरीह प्राणी ने अपनी जुबान की लगाम को ढील दे दी,तो उसका खामियाजा उसकी पीढ़ियों तक को भुगतना पड़ सकता है। पूरे ख़ानदान के कच्चे चिठों के उघड़ने में बस चन्द मिनट लगेंगें। इसलिए हे निरीह प्राणी, जुबान की लगाम कस के रखना।इसमें ही तेरी ओर तेरे ख़ानदान की आबरू निहित है।अब खाने में क्या बनाऊँ, पूछने की बारी घर के चश्मोचराग से है।माँ लाड से अपने बेटे से पूछेगी,बेटे का जवाब होता है, मम्मी आज तो छोले भटूरे बना लो यार।बहुत दिन हो गए। मम्मी प्लेट को वाशबेसिन में पटकते हुए बोलेगी,हाँ, हाँ, तेरे बाप ने तो नौकरानी बना ही रखा है मुझे इस घर में।अब मेरा इस घर में काम ही क्या है, किसी के लिए आलू के परांठे, किसी के लिए छोले भटूरे बनाना। बस मरते खपते रहो घर के लिए।एक तो मरा ये लॉक डाउन क्या लगा। मेरी तो जान ही आफत में आ गईं।सारा दिन घर पड़े पड़े , मम्मी ये बना दो, मम्मी वो बना दो। अरे पता नही हम औरतों का लोक डाउन कब होगा। हम तो पहले भी घर मे मर खप रही थी और अब भी। अब बेटी की बारी थी, आज खाने में क्या बनाऊँ , वाक्य सुनने की। बेटी की हिम्मत ही नही हो रही थी, जो अपनी पसंद बताए।माँ प्यार से बोली, लाडो क्या खायेगी। बेटी डरते डरते बोली, कुछ भी बना लो मम्मी, खा लेंगे।मम्मी ने बेटी को घूरा। बोली, “तू कौन सा कम है अपने बाप से।अब कोई बताएगा ये कुछ भी क्या है।पूछ पूछ के परेशान हूँ, आज खाने में क्या बनाऊँ।ऐसा करो दुकान से ब्रेड मंगवा लो और टोस्ट सेंक के खा लो। दो टोस्ट मेरे भी बना देना। मेरे तो सिर में दर्द हो रहा है।”मम्मी कमरे में जाते जाते बोली,”और हाँ, नाश्ता करके मुझे बता देना दोपहर को खाने में क्या बनाऊँ।”
बेटे ने बहन की तरफ देखा, बहन ने पापा को।पापा ने अखबार मुँह के आगे करते हुए कहा,”मेरी तरफ क्या देख रहे हो, मम्मी से पूछो।” मेरा सरकार से ये सुझाव है कि ये सनातन वाक्य, ‘आज खाने में क्या बनाऊँ’,को राष्ट्रीय वाक्य के रूप में मान्यता दी जाए।जल्द से जल्द लोकसभा, राज्यसभा में बिल पास करके भारतीय महिलाओं का मान बढ़ाया जाए।और पुरूषों द्वारा बोला गया वाक्य , ‘कुछ भी बना लो’, में कुछ की जगह क्या हो,ये सुझाव भी महिलाओं से ही मांगे जाएं।

 

विनय मोहन ‘खारवन’,
सेक्टर 18, जगाधरी, हरियाणा

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