बूथ तलक जाना; लोक गायक जनता जनार्दन को कर रहे मतदान के लिए जागरूक

बूथ तलक जाना; लोक गायक जनता जनार्दन को कर रहे मतदान के लिए जागरूक

Elderly-Divyang-Corona patients not going to the booth, but the condition  of going to the office for the application of postal ballot |  बुजुर्ग-दिव्यांग-कोरोना मरीजों को बूथ तक नहीं जाना पर पोस्टल ...

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के आगाज़ को अब बस चार ही दिन शेष हैं। 14 फरवरी से शुरू होने वाले चुनाव 10 मार्च को संपन्न होंगे। इस हेतु तमाम राजनीतिक पार्टियाँ अपनी कमर कस चुकी हैं।

प्रचार-प्रसार की तेज रफ्तार के साथ ही जनता जनार्दन अपना अधिकार, अपना मत दे, इसके लिए लोक गायक भूपेंद्र सिंह बसेड़ा ने प्रदेश की जनता के लिए एक जागरूकता गीत गया है। इस गीत का ज़िक्र, गायक ने स्वदेसी मंच, कू पर किया है। भूपेंद्र द्वारा किए गए पोस्ट में कहा गया है:

#koovoterscampaign

अपना अधिकार खोना नहीं,
बाद में पछताकर रोना नहीं।
हाथ जोड़कर विनती है आपसे,
आज के दिन घर में सोना नहीं।।

बूथ तलक जाना है गीत का नाम

सुरीली आवाज़ के मंच, बीबी इंटरटेनमेंट यूट्यूब चैनल को उजागर करते हुए उन्होंने कहा है कि चैनल अपनी आवाज़ द्वारा सभी मतदाताओं से लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने तथा निष्पक्ष, निर्विवाद और शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने में अपना सहयोग प्रदान करने की अपील करता है। जय हिन्द.. जय भारत..

अपने अद्भुत गीत के माध्यम से भूपेंद्र जनता को यही संदेश दे रहे हैं कि लोकतंत्र का यह महापर्व घर पर मत मनाना, जिसको भी चाहते हो जाकर उसे जिताना।

प्रदेश की दशा, दिशा और किसे जिताना है, सब कुछ प्रदेश की जनता पर निर्भर करता है। इस मौके को न गवाएँ, अपने और प्रदेश के स्वर्णिम भविष्य के निर्माण में योगदान दें। अधिकार और फर्ज़ से अवगत कराने के साथ ही भूपेंद्र ने अपने गीत के माध्यम से जनता से कहा है कि इस घड़ी को भूलना नहीं है, लोकतंत्र का यह पर्व बूथ में मनाना है।

भूपेंद्र देश के मुद्दों पर अपनी बुलंद आवाज़ देने को लेकर हमेशा ही चर्चा में रहते हैं। बात कोरोना जागरूकता की हो, भारत-नेपाल संबंधों की हो, स्वरोजगार के प्रति जागरूक करने की हो, प्लास्टिक मुक्त भारत की हो या आत्मनिर्भर भारत की, महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी सुरीली आवाज़ में लोकगीत गाकर जागरूक करने वाले लोक गायक भूपेंद्र सिंह बसेड़ा के गीतों को हमेशा ही सराहा जाता है। अब यह देखना है कि इस सार्थक गीत का जनता पर क्या असर करता है।

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