ग्रीष्मकालीन राजधानी जन भावनाओं का अपमान : उत्तराखंड लोक वाहिनी

अल्मोड़ा। राज्य सरकार के गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के बाद अल्मोड़ा में मंगलवार को उत्तराखंड लोक वाहिनी के कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखण्ड को सबसे पहले एक सूत्र में पिरो कर पहाड़ के जनमुद्दों को देश व विश्व पटल पर अपने स्थापना काल से ही उठाती रही है। वाहनी उत्तराखंड की राजधानी गैरसैंण में बनाने की पुरजोर वकालत करती रही है। लेकिन राज्य सरकार ने इसे ग्रीष्म कालीन राजधानी घोषित कर ठीक वैसा ही किया जैसा कि ब्रिटिश व आजाद भारत में नैनीताल को सैर सपाटे के लिये उत्तर प्रदेश की ग्रीष्म कालीन राजधानी बनाया था। उलोवा राजधानी को छलावा मानते हुए गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाये जाने की आज भी आवश्यकता महसूस करती है। अल्मोडा में आयोजित उलोवा की बैठक मे वक्ताओं ने कहा कि राज्य के मध्य में राजधानी बनने से प्रदेश का समग्र विकास होगा। यह राज्य के लिये शहीद हो चुके शहीदों व आन्दोलन कारियों की जनभावना है। स्थाई राजधानी के बिना कोई भी राज्य पूर्ण नही है। उलोवा सभी राज्य आन्दोलनकारियों, राजनैतिक पार्टियो से अपील करती है कि वह गैरसैण पर अपना संघर्ष जारी रखे। राज्य की ग्रीष्म कालीन राजधानी एक छलावा और आंदोलन की जन भावनाओ को आहत करने वाला है। इस अवसर पर पूरन चन्द्र तिवारी, अजयमित्र बिष्ट, अधिवक्ता जगत रौतेला, जंगबहादुर थापा, दयाकृष्ण काण्डपाल, हरीश मेहता, रेवती बिष्ट, माधुरी मेहता, कुणाल तिवारी, अजय मेहता, शमशेर जंग गुरुंग, सूरज टम्टा मौजूद रहे।

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