डिजिटल रैली बन रहा जनता तक पहुँचने का जरिया

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव करीब देख सभी पार्टियां एक्शन मोड में आ गई हैं। भाजपा ने तो 9 जून को वर्चुअल रैली के साथ चुनावी अभियान के आगाज का ऐलान कर दिया है। वहीं, राजद भी इसी दिन थाली-कटोरा के साथ प्रदर्शन कर गरीब अधिकार दिवस मनाएगी। तेजस्वी के दिल्ली से लौटने के बाद सुस्त पड़े राजद कार्यकर्ता भी एक्टिव हो गए हैं। गोपालगंज ट्रिपल मर्डर केस में राजद कार्यकर्ताओं के बवाल से यह साफ हो गया है कि पार्टी लोकसभा चुनाव वाली गलती नहीं दोहराना चाहती। चुनाव जीतने के लिए सरकार को हर मुद्दे पर घेरना ही होगा।

एनडीए में शामिल भाजपा, जदयू और लोजपा के बीच पहले ही नीतीश कुमार के चेहरे पर सहमति बन चुकी है। शाह ने तो पिछले साल ही यह ऐलान कर दिया था कि हम बिहार का चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ेंगे। ऐसे में एनडीए के सामने सीटों के बंटवारे को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।

वहीं, महागठबंधन में अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि उनकी तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा। हालांकि, राजद ने पिछले साल यह ऐलान कर दिया था कि तेजस्वी ही चेहरा होंगे। लेकिन, दूसरी पार्टियों को तेजस्वी के चेहरे पर ऐतराज है। सीटों के बंटवारे पर भी सहमति बनना अभी बाकी है।

कांग्रेस का कहना है कि सोनिया गांधी ही मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का चयन करेंगी। पिछले दिनों मांझी ने तो यहां तक कह दिया था तेजस्वी अपने सामने किसी को नहीं समझते हैं। कई दिनों से कोऑर्डिनेशन कमेटी की मांग कर रहे हैं लेकिन, इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रालोसपा भी तेजस्वी के चेहरे पर सहमत नहीं है। बीच में शरद यादव का नाम भी उछला लेकिन, उन्होंने यह साफ कर दिया कि मैं सीएम के रेस में नहीं हूं।

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