पुण्यतिथि: एकात्म मानव दर्शन के महान प्रणेता: पंडित दीनदयाल उपाध्याय

जयपुर
11 फरवरी 2022

भारत माँ की गोद में ऐसे कई महान नेताओं ने जन्म लिया है, जिन्होंने देश और समाज को नई राह दिखाई है। इनमें से एक नेता थे महान पंडित दीनदयाल उपाध्याय। दीन दयाल ने देश की राजनीति को इस तरह से एकजुट किया था कि लोग उन्हें एकात्म मानवतावाद के पुरोधा मानते थे। देश आज इस एकात्म मानव दर्शन के महान प्रणेता की पुण्यतिथि मना रहा है। गुजरात तथा राजस्थान के कई बड़े नेता सहित जनता उन्हें स्वदेसी मंच, कू पर श्रद्धांजलि देती नज़र आ रही है।

इस दौरान गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री, भूपेंद्र पटेल ने कू के माध्यम से कहा है:

हमारी राष्ट्रीयता का आधार भारत ही नहीं, भारत माता है।
माँ शब्द हटा दिया जाए तो भारत भूमि का टुकड़ा रह जाएगा। -पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी।

एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि।

वहीं बीजेपी गुजरात ने अपने ऑफिशियल कू हैंडल के माध्यम से कहा है:

ये दीनदयाल जी ही थे जिन्होंने भारत की राष्ट्रनीति, अर्थनीति, समाजनीति, राजनीति इन सभी पहलुओं पर भारत के अथाह सामर्थ्य के हिसाब से तय करने की बात बड़ी मुखरता से कही थी, लिखी थी।

– प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी

#narendramodi #bjpgujrat

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, गजेंद्र सिंह शेखावत कहते हैं:

एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय के पुरोधा, प्रखर राष्ट्रवादी, कुशल संगठनकर्ता श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर श्रद्धांजलि।

राष्ट्रोत्थान तथा समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए पंडित दीनदयाल जी ने जीवन पर्यंत अविस्मरणीय योगदान दिया। आपका जीवन हम सभी भारतीयों के लिए प्रेरणादायी है।

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एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय के पुरोधा, प्रखर राष्ट्रवादी, कुशल संगठनकर्ता श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर श्रद्धांजलि। राष्ट्रोत्थान तथा समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए पंडित दीनदयाल जी ने जीवन पर्यंत अविस्मरणीय योगदान दिया। आपका जीवन हम सभी भारतीयों के लिए प्रेरणादायी है।.

Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) 11 Feb 2022

राज्य महासचिव- भाजपा तथा सवाई माधोपुर, राजस्थान की पूर्व विधायक दिया कुमारी कू के माध्यम से श्रद्धांजलि देते हुए कहती हैं:

भारतीय जनसंघ के संस्थापक, हमारे पथ प्रदर्शक, प्रखर राष्ट्रवादी, उत्कृष्ट संगठनकर्ता एवं अंत्योदय के प्रणेता परम श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि ‘समर्पण दिवस’ पर सादर नमन। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने राजनीति से परे रहकर राष्ट्र को सर्वोपरि माना।

सूरत विधायक, पूर्णेश मोदी ने माननीय प्रधानमंत्री की पोस्ट का चयन करते हुए कहा:

हम जैसे-जैसे दीनदयाल जी के बारे में सोचते हैं, बोलते हैं, सुनते हैं, उनके विचारों में हमें हर बार एक नवीनता का अनुभव होता है।

– प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी

सूरत महापौर, हेमाली बोघवाला कहती हैं:

एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता हमारे प्रेरणास्रोत श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को पुण्यतिथि पर विनम्र अभिवादन। #deendayalupadhya

केंद्रीय संसदीय कार्य और संस्कृति राज्य मंत्री, अर्जुन राम मेघवाल कहते हैं:

प्रखर राष्ट्रवादी, उत्कृष्ट संगठनकर्ता, अंत्योदय एवं एकात्म मानववाद के प्रणेता, हमारे पथ प्रदर्शक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन।

जन्म

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर, 1916 को उत्तर प्रदेश स्थित ब्रज के मथुरा जिले के छोटे से गाँव ‘नगला चंद्रभान’ में हुआ था। आजादी से पहले और आजादी के बाद भी उन्होंने अपने लेखन कार्य और सामाजिक कार्यों से जनता की सेवा की। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय एकता को अपना मिशन बना लिया।

पं. दीनदयाल जी अक्सर कहा करते थे कि मैले कुचैले अनपढ़ लोग हमारे नारायण हैं, हमें उनकी पूजा करना चाहिए। यह हमारा सामाजिक और मानव धर्म है।

मृत्यु एक षड्यंत्र

भारत में एकता की राह दिखाने वाले इस महान नेता की लाश एक सुनसान इलाके में मिली। चालीस साल पहले 11 फरवरी, 1968 को भारतीय जनसंघ को अपने राजनीतिक इतिहास का सबसे गहरा आघात सहना पड़ा था, जब उसके नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की हत्या कर दी गई थी।

राजनीतिक कार्य करने साथ लगातार लेखन करते रहने को देखते हुए आडवाणी ने उपाध्याय से एक स्टेनो साथ रखने को कहा था, लेकिन उन्हें यह सुझाव रास नहीं आया। उस समय पटना तक के सफर में उनके साथ कोई रहा होता, तो शायद उनकी हत्या न होती। दीनदयाल उपाध्याय जी की लाश यात्रा के बीच में ही मुगलसराय रेलवे स्टेशन के यार्ड में मिली थी। आडवाणी उन दिनों जनसंघ के नेता होने के साथ संघ के पत्र ऑर्गेनाइज़र के संपादक भी थे, जिनके लिए दीनदयाल उपाध्याय राजनीतिक डायरी लिखते थे।

पं. दीनदयाल उपाध्याय सच्चे अर्थों में युगपुरुष थे। उनका व्यक्तित्व राष्ट्रीय चिंतन, उच्च विचारों तथा मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण था। वे दरिद्र नारायण को अपना आराध्य मानते थे।

दीनदयाल उपाध्याय जी के अनमोल वचन

जब राज्य में आर्थिक एवं राजनीतिक दोनों शक्तियाँ आ जाती हैं, तो इसका परिणाम धर्म की गिरावट होता है।
पिछले 1000 वर्षों में हमने जो भी अपनाया है, फिर चाहे हमने उसे मजबूरन अपनाया हो या इच्छा से, हम उसे त्याग नहीं सकते हैं।
स्वतंत्रता का तभी कोई अर्थ है, जब हम हमारी संस्कृति को व्यक्त करने के लिए साधन बनें।
नैतिकता के सिद्धांत किसी भी व्यक्ति द्वारा नहीं बनाए जाते, बल्कि उन्हें खोजा जाता है।
भारत में नैतिकता के सिद्धांत को धर्म के रूप में जाना जाता है, यह जीवन का नियम है।

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