स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों की उम्मीदें, इन 75 वर्षों में कितने कदम चले हम

डिजिटल डेस्क : लगभग एक सौ तीस करोड़ लोगों का देश भारत जो कभी सोने की नगरी कहा जाता था,स्वतंत्रता के इन 75 वर्षों में किन किन क्षेत्रों में कितने कदम आगे बढ़ा है.इसका मूल्यांकन निम्न बातों से किया जा सकता है कि आज भी एक आम भारतवासी 75 वां स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए क्या सोच रहा है…

उम्मीद है अब देश वासियों को देश समाज में व्याप्त विविध कुरीतियों एवं अंधविश्वासों से स्वतंत्रता मिलेगी.देशवासियों में अंधविश्वास की जगह वैज्ञानिकता का प्रसार हो.प्रगतिशील विचारधारा के विकास के लिए काम किया जाए.हर घर के बच्चे भर पेट भोजन करके सोएं.किसानों और मजदूरों को उनके श्रम और बदलते समय के अनुरूप सम्मानजनक कीमत और मजदूरी मिले.शिक्षा स्वास्थ्य, बिजली, पानी के लिए लोगों को तरसना नहीं पड़े.देश से घूसखोरी और भ्रष्टाचार मिटे पूरी तरह से समाप्त किया जाना चाहिए.

सभी देशवासियों के साथ एक समान व्यवहार किया जाए.जाति धर्म वर्ग समुदाय के नाम पर भेदभाव समाप्त किया जाना चाहिए।

देश के किसी कोने में भी अब कोई मजबूर किसान आत्महत्या नहीं करे इसके लिए नीति बनाई जाए.देश के बहु बेटियों के लिए सड़क और गलियां सुरक्षित हो ताकि वो भी दिन हो या रात गांव हो या शहर घर से कार्यस्थल तक बिना किसी डर भय के आ जा सकें.हत्या बलात्कार और व्यभिचार पर काबू पाने के लिए समाज को जागरूक करने के साथ साथ प्रसांगिक कानून व्यवस्था स्थापित किया जाए। देश के विकास में सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले कर्मचारियों को सम्मानजनक ससमय वेतन,भत्ते, पेंशन, और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हो.

पढ़े लिखे नौजवान युवा युवतियों को योग्यता के अनुसार काम और नौकरी मिले ताकि उनके ज्ञान और उर्जा का देश हित में उपयोग किया जा सके.राष्ट्र के सम्मान के लिए सभी लोग मिल जुल कर काम करें.आपातकाल में एक दूसरे की सेवा और सहायता करेने से दूर नहीं भागें.सड़क गड्ढा मुक्त बने, शहर और गांव की गलियां गंदगी से मुक्त हों.हर तरफ स्वच्छ और साफ सुथरे वातावरण का निर्माण हो.प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को हर वक्त निभाने के लिए तैयार हो.

देशवासियों के सामने ऐसा कोई वादा नहीं किया जाए, जिससे उनके भावना के साथ खिलवाड़ हो सके.देश को जाति धर्म और संप्रदाय के नाम पर किसी भी प्रकार के बांटने का प्रयास नहीं हो.सभी देशवासियों को एक समान धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्राप्त हो.लोग छुआछूत और भेदभाव से मुक्त हों.समाज के वैसे लोग जो विकास में पिछड़ रहे हैं उनके लिए विशेष व्यवस्था किया जाए. देश और देशवासियों की रक्षा में तैनात सुरक्षा प्रहरियों को आवश्यक अत्याधुनिक सुविधा प्रदान किया जाए. मुख्यधारा से भटके हुए लोगों का पुनर्वास किया जाए और उनके बच्चों को शिक्षा और रोजगार से जोड़ा जाए.देश में एक समान नागरिक संहिता और शिक्षा, स्वास्थ्य प्रणाली लागू किया जाए.समान काम समान वेतन एवं पुरानी पेंशन सुविधा पुनः बहाल की जाए.निजी क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार सभी लोगों के लिए एक समान उपलब्ध हो.निजी क्षेत्र में भी सरकारी नीतियों का पालन सुनिश्चित किया जाए.

देश के राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में नहीं दिया जाए.साथ ही राष्ट्रीय संपत्ति का विकास किया जाए.देशवासियों को भारतीय सभ्यता और संस्कृति से परिचित करवाया जाना चाहिए.उन्हें अपने गौरवपूर्ण इतिहास के बारे में बताया जाए.हर देशवासी को हड़प्पा मोहनजोदड़ो की सभ्यता से लेकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तक की कहानी बताया जाना सुनिश्चित किया जाए.नई पीढ़ी में बढ़ रहे नशाखोरी पर रोक लगे.अश्लील फिल्म और गानों के निर्माण पर रोक लगे.

युवाओं में ऐसी चेतना का विकास किया जाए जिससे कि वे घृणा फैलाने वाले लोगों को घृणा फैलाने से रोक सकें तथा देश को मोबलीचिंग जैसे समस्या से बदनाम होने से बचाया जाए.किसी व्यक्ति को कानून व्यवस्था अपने हाथ में नहीं लेने दिया जाए.सकारात्मक कार्य करने वाले लोगों को सरकार और समाज द्वारा प्रोत्साहित किया जाए.पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया हो एवं जल मिट्टी वायु एवं ध्वनि को प्रदूषण मुक्त किया जाए. प्रदूषण कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों को अधिक से अधिक प्रयोग करने पर जोर दिया जाए.सरकारी अवसंरचनात्मक विकास यथा सड़क पुल पुलिया विद्यालय अस्पताल व अन्य सरकारी कार्यालयों के निर्माण करने वाली एजेंसियों को कम से कम 5 वर्ष तक रखरखाव करने की जिम्मेवारी दी जाए ताकि घटिया निर्माण से बचा जा सके.सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त किया जाना अति आवश्यक है.

सभी जीव जंतुओं के साथ दया भाव पूर्ण व्यवहार किया जाए तथा जीव हिंसा से लोग दूर रहे ऐसा प्रयास किया जाए. भारत एक बार फिर गुटनिरपेक्ष, पंचशील सिद्धांत के साथ अन्य देशों के साथ मधुर संबंध बनाने के लिए प्रयास करे.सभी देशवासियों को विचार अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त हो. देश में वैसे चुनाव प्रणाली का विकास किया जाए जिस पर देशवासियों के साथ साथ पक्ष और विपक्ष को पूर्ण भरोसा हो.झूठ के बुनियाद पर राजनीति करने वाले लोगों को चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.देश की जांच एजेंसियां कोई गलती नहीं करे जिससे कि कोई उन पर उंगली उठाये यह सुनिश्चित किया जाए.

संवैधानिक प्रावधानों को हर हाल में अच्छुन बनाए रखा जाए. उन क्षेत्रों में जहां समाज के सभी तबकों के सम्मानजनक भागीदारी आजतक नहीं हो पई है यथा पत्रकारिता, न्यायपालिका उच्च शिक्षा, सेवा क्षेत्र, सर्वोच्च केंद्रीय सेवाओं में भागीदारी बढ़ाने का पुरजोर प्रयास किया जाए, पहले से खाली सीटों पर अविलंब बहाली सुनिश्चित कर बैकलौग समाप्त किया जाना चाहिए. मौलिक अधिकार और मानवाधिकार की रक्षा किया जाएगा।साथ ही देशवासियों को मौलिक कर्तव्य के पालन करने के लिए प्रेरित किया जाए.लोगों में नैतिकता का विकास हो इसके लिए सतत् प्रयास किया जाए.

इन्हीं चंद उम्मीदों के साथ देशवासियों को एक बार फिर स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

©®
गोपेंद्र कु सिन्हा गौतम
सामाजिक और राजनीतिक चिंतक
औरंगाबाद बिहार
9507341433

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