नेपाल के प्रधानमंत्री के पुतले की शवयात्रा निकालकर किया पुतला दहन

झूलाघाट (पिथौरागढ़)। झूलाघाट में बसे नेपाल और भारत के लोगों ने नेपाल के प्रधानमंत्री के पुतले की शवयात्रा निकालकर पुतला दहन किया। सीमांत के लोगों ने प्रधानमंत्री पर अपने राजनैतिक फायदे के लिए रोटी बेटी के संबंधों को तोड़ने का आरोप लगाया है। झूलाघाट कस्बा भारत नेपाल की मित्रता की मिसाल है। महाकाली नदी के छोर पर भारत का झूलाघाट और दूसरी और नेपाल का जूलाघाट कस्बा है। दोनों देशों के लोग सीमा पर बेरोकटोक आने के साथ ही वही रहते भी है। झूलाघाट के लोगों को नेपाली भाषा आने के साथ ही जूलाघाट (नेपाल) के लोग हिंदी भाषा में भारत के लोगों से बात करते हैं। यहां के लोग किसी भी हाल में नेपाल की राजधानी काठमांडू में होने वाली बातों से मतलब नही रखते, परंतु कुछ दिनों से नेपाल की सरकार चीन के इशारे पर भारत विरोधी काम कर रही हैं। इसी से गुस्साए झूलाघाट में रहने वाले दोनों देशों के लोगों ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली के पुतले की शवयात्रा निकाली। शवयात्रा कोमल चौक से सीमा पुल होते हुए रामलीला मैदान तक गयी। अंतिम संस्कार में शामिल लोगों ने रामलीला मैदान के पास पुतला का दहन किया। लोगों ने कहा नेपाल की मौजूदा केपी ओली सरकार के निर्णयों से सीमाओं के लोगो के बीच बने रिश्तों में कोई प्रभाव नही पड़ने वाला। पुतला कार्यक्रम में संजीव जोशी, मनोज जोशी, संदीप भट्ट, गिरीश पंत, दसवीर पंत, किशोर जोशी, तिलक चंद, उमेश भट्ट, विजय भट्ट, मदन मोहन भट्ट, रमेश कलखुड़िया, लवदेव भट्ट, मदन पंगरिया, सौरव श्रेष्ठ, दीपक इजरवाल आदि मौजूद रहे।

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