विधानसभा सत्र : सतपाल महाराज नहीं दे पाए अधिकांश प्रश्‍नों के जबाब

देहरादून। उत्तराखंड के विधानसभा मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को प्रश्नकाल में विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की जमकर घेराबंदी की। हालांकि मंत्री ने भी ज्यादातर अनुपूरक सवालों के जवाब में ‘आपको बाद में जवाब उपलब्ध करा दिया जाएगा’ की चिर परिचित लाइन पकड़ कर खुद को सुरक्षित निकालने में कामयाबी हासिल की। धनौल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने सिंचाई मंत्री से टिहरी बांध के किनारे पर स्थित ग्रामीणों के बांध में डूबने से हुए जान माल के नुकसान का विवरण मांगा था।

इसके जवाब में सिंचाई मंत्री ने बताया कि 2017-18 से इस कारण 14 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 2011 में केंद्र सरकार ने तय किया था कि बांध के किनारे खतरे वाले स्थानों पर तारबाढ़ जैसे सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। इस पर प्रीतम पंवार ने दस साल से एक भी जगह सुरक्षा उपाय न होने पर सवाल उठाए। इस दौरान भाजपा विधायक मुन्ना चौहान ने भी मंत्री से सवाल पूछा कि सुरक्षा उपाय तो बाद में होंगे क्या सरकार ने खतरे वाले स्थानों का चिन्हीकरण कर लिया है।

इसी तरह भाजपा विधायक खजानदास ने वन भूमि के कारण अटकी सड़कों की जानकारी लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतपाल महाराज से मांगी। इस पर मंत्री के जवाब से अंसुष्ट खजानदास ने कहा कि आखिर क्या कारण है कि भूगोल, समाज, संस्कृति में उत्तराखंड के समान होने के बावजूद हिमाचल में इस तरह की दिक्कतें नहीं आती। इस प्रश्न पर भी मुन्ना चौहान ने मंत्री से क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण न होने के कारण अटकी सड़कों का भी विवरण देने को कहा। खास बात यह रही कि मंत्री सतपाल महाराज ने ज्यादातर अनुपूरक सवालों के जवाब में सदस्यों को बाद में सूचित किए जाने का बयान देकर खुद को सुरक्षित निकाला।

नहीं बदलेंगे सड़क के मानक

कांग्रेस विधायक करन माहरा ने लोनिवि मंत्री से सवाल पूछा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान अब प्रथम चरण के कार्य में रिटेनिंग वॉल, आसीसी, कल्वर्ट, माइनर ब्रिज के कार्य नहीं कराए जा रहे हैं। इससे सड़क निर्माण में दिक्कत आ रही है। इस दौरान भाजपा विधायक संजीव आर्य ने भी सवाल उठाया कि सरकार पहाड़ में सड़क निर्माण के लिए पूर्ववर्ती व्यवस्था ही लागू करे। हालांकि मंत्री ने दो टूक जवाब दिया कि सड़क निर्माण के मानक नहीं बदले जाएंगे।

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