लेख : कोरोना से बचाव, इम्युनिटी और भविष्य

टीम डिजिटल : इम्यूनिटी बढ़ने से कोरोना अवश्य हारेगा। सीधी सी बात है ,जब शरीर मजबूत होगा रोग प्रतिरोधक क्षमता बलवान होगी, तो कोई भी वायरस और बैक्टीरिया उस पर अपना प्रभाव नहीं डाल सकेगा। जिस प्रकार मजबूत दीवार होने पर दुश्मन उसे नहीं भेद पाता,इसी प्रकार शरीर की इम्यूनिटी पावर मजबूत होने पर लोग रूपी शत्रु शरीर पर प्रभाव नहीं डाल पाता। जिस तरह संक्रमण बढ़ रहा है, वह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है। सबकुछ कर सकती है सरकार, लेकिन अपनी इम्युनिटी तो आपको ही बनानी होगी।बनाए रखियेगा इसे,कोरोना हारेगा और जीतेगा मानव। रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी दिशा निर्देश दिए हैं। जिसमें मास्क प्रयोग करना, हैंड वॉश और आयुष काढ़ा का सेवन विशेष रुप से उल्लेखनीय है। इन गाइडलाइंस प्रयोग करते हुए इम्यूनिटी को बढ़ाना है और कोरोना हराना है। मास्क हर समय लगाना कतई उचित नहीं। जब घर से बाहर है उस समय मास्क लगाएं।घर के भीतर भी इसे लगाना या पूरे दिन लगाए रखना ठीक नहीं। मास्क हमारी सुरक्षा के लिए है, परेशानी बढ़ाने के लिए नहीं। अब यदि घर में भी असुरक्षित वातावरण है तो फिर लगाए रखना मजबूरी है। हाल ही में ब्रिटिश स्टडी जर्नल की एक रिपोर्ट में आया है कि मास्क लगाए रखने से सांस छोड़ते वक्त आंखों में हवा चली जाती है।जिससे आंखों में परेशानी होने लगती है, खाज आने लगती है,फिर बार-बार उंगली आंख में लगाई जाती है और यह उंगली लगाना ही कई समस्याओं को पैदा कर देता है। इसके अलावा नाक ठोड़ी चेहरे पर मास्क बांधे रखने से निशान पड़ने जैसी समस्या भी सामने आयी है। मास्क लगाकर व्यक्ति सुरक्षा के प्रति ज्यादा आश्वस्त हो जाता है और वह फिर हैंड वॉश कैसे अनिवार्य कार्य में लापरवाही भी कर देता है। केजीएमयू के डा. वेदप्रकाश के अनुसार श्वास छोड़ते वक्त मुंह से निकले वायरस मास्क में भीतर चिपक जाते हैं।मास्क नम कर देते हैं। जब दोबारा सांस लेते हैं तो यह शरीर में फिर प्रवेश कर सकते हैं। जिससे शरीर में वायरस लोड बढ़ जाता है। श्वांस के मरीजों को भारी कष्ट हो सकता है। केजीएमयू के डॉ सूर्यकांत जी की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ लोगों में सिर दर्द जैसी समस्याएं पैदा हो रही है। विशेषज्ञों की सलाह है कि मास्क का प्रयोग तब ही करें जब घर से बाहर भीड़ भाड़ वाली एरिया में,कार्यालय में हो घर में इसका प्रयोग आवश्यक नहीं।और में एक बात और यूज किए मास्क को इधर उधर न डालें। जलाकर नष्ट कर दें। कपड़े वाले मास्टर को प्रतिदिन धोएं और धूप में सुखाएं। समझ लीजिए और एन-95 मास्क भी धोकर चार दिन यूज करने के निर्देश चिकित्सकों को है यानी एक मास्क दोबारा पांचवें दिन ही उपयोग होगा।तो साधारण मास्क के प्रयोग की सावधानी का अंदाज आप स्वयं लगा सकते हैं। इन दिनों अॉखें प्रभावित हुई है । वर्क फ्राम होम के कारण अधिक समय लेपटाप या डेस्कटाप का प्रयोग करने से। जिन्होंने काम नहीं किया उनकी आंखें मोबाइल और लेपटाप पर लेखन,फिल्म देखना,चैटिंग करना के कारण,पढ़ना आदि के कारण प्रभावित हुई। छात्र तो आजकल आनलाइन पढ़ाई कर ही रहे हैं। इन दिनों आंखों में जलन, लाल होना, खाज आना, थकान होना, रोशनी सहन न कर पाना जैसी समस्याएं बढ़ी है। चश्मे का नं भी तेजी से बढ़ा है। यह समस्या 99% लोगों के साथ हो रही है। कुछ महसूस कर रहे हैं, कुछ नहीं। लेकिन आंखें प्रभावित हो रही है। देर रात तक मोबाइल का प्रयोग भी इसका एक कारण है। लेपटाप, मोबाइल का कम प्रयोग करें।यह कम प्रयोग की बात व्यवहारिक नहीं होगी शायद। प्रयोग न करें तो काम कैसे होगा? काम तो करना ही होगा। अब इस समस्या से निपटा कैसे जाएं। चिकित्सकों की सलाह लें।ठंडे,ताजे पानी से दिन में कई बार आंखों को धोएं। विटामिन ए से भरपूर खाद्य सामग्री,फल,सब्जी सेवन करें। खीरे के टुकड़े आंखों पर रखकर उनको सुकून दिया जा सकता है। यह ज्वलंत और समसामयिक चुनौती है मानव के सामने कि कोरोना से स्वयं को बचाते हुए कैसे आगे बढ़े? संक्रमण बढ़ने और मरीजों के ठीक होने के आंकड़ों की जादूगरी के बीच जरा सी लापरवाही भी घातक हो सकती है। जब अभी दवाई ही नहीं तो मरीजों का संक्रमण से मुक्त हो, स्वस्थ होना जादू ही तो है। बस इस जादू को समझ और अपनाकर ही आगे बढ़ सकते हैं। क्या चाहिए इस जादू के लिए ? अनावश्यक न घूमना,स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना ( इसमें हाथ धोना,मास्क लगाना भी शामिल हैं), भरपूर आराम, प्रोटीन व विटामिन का प्रयोग, नियमित दिनचर्या और सेल्फ कोरेंटाइन होने की हिम्मत। थोड़ा योग प्राणायाम आदि और सबसे महत्वपूर्ण आयुष काढ़ा पीना। अपनाएं इस जादुई तकनीक को जिसने भारत को कोरोना रिकवरी में नंबर वन बना रखा है। क्या कहा,प्रोटीन व विटामिन? भाई कौन कह रहा है दवाई या गोली के रुप में लो। ये तो दाल,सब्जी, रोटी चावल, मौसमी फल और दूध आदि से पर्याप्त मात्रा में मिल जाते हैं। बस स्वच्छ आहार, विहार,आचार, नहीं होने देगा बीमार।जब बने रहेंगे स्वस्थ,चलता रहेगा प्रगति रथ। इस रथ में नहीं आएगा व्यवधान,बस जादू अपनाओ श्रीमान। लॉक डाउन की चुनौतियां ही, भविष्य की उम्मीदें हैं? जी हां, अब तो इन चुनौतियों के साथ ही भविष्य की आशा जुड़ी हुई है। सबसे बड़ी चुनौती है कोविड-19,वायरस का इलाज।इसके कारण ही लाकडाउन करना पड़ा और चिकित्सा, सुरक्षा, रोजगार, शिक्षा, आवागमन, उद्योग धंधे, सामाजिक संबंध, जैसी अनेक चुनौतियां सामने आ खड़ी हुई। इनके कारण काम जनजीवन बहुत प्रभावित हुआ। ‘जान है तो जहान है’ और ‘पहला सुख निरोगी काया’ जैसे सिद्धांतों को मानने वाले भारतीय समाज ने इन चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया और कर रहा है। अब भविष्य की आशा की बात, चिकित्सा में आयुर्वेद,घरेलू परंपरागत चिकित्सा। सुरक्षा में सेल्फ कोरेंटाइन। रोजगार में परंपरा गत स्वदेशी उत्पाद,हस्तकौशल। शिक्षा में आनलाइन और पारिवारिक शिक्षा। सामाजिक संबंधों में दिखावे और झूठी शान प्रदर्शन न होना। आवागमन में अत्यावश्यक आना जाना। उद्योग धंधों में कुटीर उद्योगों के बढ़ने की आशा है।जो समाज में दिखायी भी देने लगी है। बस, सबसे बड़ी चुनौती कोविड-19 का इलाज जब तक खोजा जाए,तब तक आयुष काढ़ा नियमित सेवन,ये ही भविष्य की आशा है

– डॉ.अनिल शर्मा ‘अनिल’
धामपुर, उत्तर प्रदेश

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