भगवान को भी लग रही गर्मी, बचने को कर रहे चंदन का लेप; लस्सी व कुल्फी का लग रहा भोग

Doon Horizon Desk : गर्मी बेहाल कर रही है। तपिश के कारण मंदिरों में भगवान तक की दिनचर्या बदल गई है। भक्तों ने भगवान को गर्मी से बचाने के जतन शुरू कर दिए हैं। भगवान की प्रतिमाओं को सूत्री वस्त धारण कराने के साथ शीतलता प्रदान करने के लिए चंदन का लेप किया जा रहा।

चंपा, चमेली, गुलाब आदि फूलों व सीप, मोती से बने आभूषण से आराध्य देव का श्रृंगार होने लगा है। भगवान का भोग व उसका समय भी बदल गया है।

हल्द्वानी के प्राचीन श्रीराम मंदिर में प्रात:कालीन सेवा के दौरान श्रीराम, सीताजी, लखन लाल व युगल किशोरजी को घड़े के शीतल जल से स्नान, अभिषेक आदि कराया जाता है।

सूती धोती के अंग वस्त्र के बाद पोशाक पहनाई जाती हैं। शरीर को शीतलता मिले, इसके लिए भगवान के मस्तक पर चंदन का लेप किया जाता है। वृंदावन का खास चंदन यहां पहुंचता है।

मंदिर के व्यवस्थापक पंडित विवेक शर्मा बताते हैं कि ग्रीष्मकाल में राजभोग भी बदल जाता है। आजकल खरबूज व लस्सी से प्रभु सेवा होती है।सायंकाल ठंडे दूध, कुल्फी आदि से अलग-अलग दिन भोग लगता है। शयन के समय हाथ के पंखे से ठाकुरजी की सेवा होती है। आधुनिक समय में बिजली के पंखे, कूलर का भी उपयोग होने लगा है।

श्रीराम मंदिर हल्द्वानी के व्यवस्थापक पं. विवेक शर्मा ने बताया कि ऋतुओं के आधार पर भगवान के पूजन की परंपरा सैकड़ों वर्ष पुरानी हैं। जिसका आज भी निर्वहन होता है। चराचर जगत को चलाने वाले भगवान हर अहसास रखते हैं। इसी मनोभाव से प्रभु सेवा होते आई हैं।

प्रभु सेवा के समय में बदलाव

गर्मियों में मंदिरों के पट एक घंटे पहले खुलने लगे हैं। शहर के प्राचीन श्री सत्यनारायण मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित शेखर चंद्र जोशी ने बताया कि चार बजे पट खुलने के बाद पांच से 10 बजे तक नित्य पूजन होता है।

मखमली व ऊनी वस्त्रों के बजाय भगवान को सूत्री पोशाक धारण कराई जाती है। पिपलेश्वर महादेव मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में शीतल जल से अभिषेक करने के साथ शिवलिंग पर चंदन का लेप किया जाता है।

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