ईपीएफ पंजीकरण।। ईपीएफ और ईएसआई लागू किये जाने के विरोध में धरने पर बैठे ठेकेदार

रुडकी। रुड़की नगर निगम में सोमवार से करीब साढ़े छह करोड़ की राशि के टेंडर की बिक्री की जानी थी, लेकिन निगम की ओर से ठेकेदारों को ईपीएफ पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया। इस बात को लेकर ठेकेदारों ने विरोध शुरू कर दिया और कुछ ठेकेदार निर्माण अनुभाग कार्यालय का गेट बंद करके धरने पर बैठ गए। अन्य ठेकेदारों को भी टेंडर नहीं लेने दिए।

ठेकेदारों का कहना था कि नगर निगम अनिवार्य रूप से ईपीएफ लागू कर रहा है। जिससे ठेकेदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। कहा कि कुछ ठेकेदार तो कम लागत के कुछ ही कार्य कर पाते हैं और उसी के अनुसार अस्थाई लेबर रखते हैं। ऐसी स्थिति में वह नियमित लेबर का खर्च कैसे वहन कर पाएंगे।

ठेकेदारों की मांग थी कि ईपीएफ, ईएसआई खत्म होना चाहिए या फिर कैटेगिरी बनाई जाए छोटे कार्य करने वाले ठेकेदारों पर यह लागू नहीं होना चाहिए। वहीं कुछ ठेकेदारों ने टेंडर डाले जाने की मांग की और एमएनए से मिले। एमएनए धरनारत ठेकेदारों को समझाने पहुंचे।

वहीं इस दौरान ठेकेदारों के दोनों गुट भी आमने सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच जमकर नोकझोंक हुई और नौबत धक्का मुक्की तक आ गयी। बाद में नगर आयुक्त विजयनाथ शुक्ला ने दोनो पक्षों के साथ बैठकर वार्ता की और तय किया गया कि एक सप्ताह बाद फिर से टेंडर डाले जाएंगे।

ठेकेदारों की एक यूनियन के अध्यक्ष शोभित गौतम का कहना है कि कुछ लोग धरने पर बैठ गए जबकि वह टेंडर बिक्री किए जाने की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ईपीएफ और ईएसआई लागू होने के लिए कैटेगिरी हैं और छोटे ठेकेदारों पर इसका बोझ नहीं डालना चाहिए यह हम भी चाहते हैं।

वहीं दूसरी यूनियन के अध्यक्ष संजय गुप्ता का कहना है कि ठेकेदारो पर कोरोना के दौरान पहले ही भारी मार पड़ी है ऐसे में ईपीएफ और ईएसआई लागू होना कहां तक ठीक हैं कहा कि हम इसका विरोध करते हैं। इस संबंध में नगर आयुक्त से मांग की गई है कि वह जीओ दिखाएं।

कहा कि जरूरत पड़ी तो इस संबंध में कोर्ट भी जाने से पीछे नही हटेंगे।

RNS/DHNN

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